ऊपर वाले की दया

मुझे लगता है भारी षड्यंत्र रचा जा रहा है कि हमारा देश भूखों का देश है। हमसे बेहतर नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान हैं - ऐसा कहा जा रहा है। तन बदन में आग लगी जा रही है।

 तुझ में देशभक्ति की खुराक कुछ ज्यादा ही है रे इसीलिए आग बबूला हुआ जा रहा है। हमारी खाल मोटी है। ऐसी बातों से हम पर कोई असर नहीं होता। भूख तंदुरुस्त मनुष्य को लगती है। हम भूखे हैं का मतलब हट्टे कट्टे हैं, तंदुरुस्त हैं। उसे इस तरह लिया जाना चाहिए।   

बदनाम करने की कोई चाल नहीं है भाई। अब आप पूछोगे क्या भूख से मर जाएं तो जवाब यह है कि जीना मरना हमारे हाथों में नहीं वह तो हमारा कर्मफल है। जीना मरना डॉक्टर के हाथों में भी नहीं। जब उसका बिल देखते हैं तो दिल की धड़कन रुक सकती है। भूख प्यास तो हमारे प्रारब्ध हैं, वरना हमारे देश को अन्नपूर्णा कहा जाता है। फसलें कितनी ज़्यादा होती हैं। लेकिन क्या फायदा। किसान कर्जों के भार तले दबकर आत्महत्या कर रहे हैं।  कोई पालनहार रोक सका?  

कुछ भी कहें आप हमारे देश की सबकी आंखों में कोई कीमत नहीं रही। देखिए सारे नेता जब बीमार पड़ते हैं तो सीधे विदेश जाकर इलाज करवाते हैं। अधिक नौकरियों के लिए अमेरिका यात्रा की कोशिश होती है। हमारे देशवासी यह सब करते रहे, कर रहे हैं। देखिए विदेशों में क्या है हमारी महानता भी तो जानो! वे जिस विमान पर जाते हैं उसका आविष्कार किसने किया? हम ही ने तो। रामायण में पुष्पक विमान का जिक्र है। परखनली शिशु की खोज भी हमने ही की थी। 

कौरव क्या थे? परखनली शिशु ही तो थे। प्लास्टिक सर्जरी भी हमने ही ईजाद की थी। पार्वती पुत्र गणेश जी को हाथी का सिर शिव जी ने ही तो लगाया था। इस तरह बोलते जाएं तो लंबी फेहरिस्त होगी । दुख की बात यह है कि हमें अपनी तारीफ खुद करनी पड़ती है, अपने बारे में कुछ बताना पड़ता है। आपने देखा ही है कि हमारे भारतीय मूल के कमला हैरिस और ऋषि सुनाक। एक अमेरिका की उपाध्यक्ष हैं तो दूसरे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री। 

उन्होंने भारतीयों की महत्ता को बढ़ाया। 

अगले वर्ष हम भी चांद पर कदम रखेंगे। अगर बात की जाए तो महाभारत में जो अर्जुन थे उन्होंने बहुत पहले देवलोक पर कदम रखा था। इस तरह सभी चीजों के लिए हमारे पास शॉर्टकट और कई उपाय हैं। सारे विदेशी हमारे पास से चुराकर इसे अपनी महानता और श्रेष्ठता साबित करने में जुटे हैं। इनकी बातों का जवाब देना है तो हमें मैदान में उतरना चाहिए।

तो क्या करना चाहिए?

ऐसी सारी बातें जय भारत कहते हुए अपने भाषणों में बताएं। अगर कोई प्रायोजक मिलता है तो देखो। हमें भी थोड़ा बहुत मिल जाएगा। एक और बात जनता का मूड कब कैसा हो पता नहीं। भूखे पेट परेशान दिमाग के लोग हम पर पत्थर भी फेंक सकते हैं। पहले से सुरक्षा की बात करें तो अपनी रक्षा के लिए दो बुलेट प्रूफ जाकेट भी बनवा लो। बाकी तो ऊपर वाले की दया है।


डॉ0 टी0 महादेव राव

विशाखापटनम आंध्र प्रदेश

9394290204