एक पन्ना इतिहास का

वर्त्तमान खुस होकर हँस रहा जुड़ रहा एक पन्ना खास 

इतिहास के किताब में देखो जुड़ गया एक पन्ना खास।। 


 शुभ दिन है शुभ घड़ी है   रघुवर पुलकित  हो रहे 

नीच और अधमी के मुह पर कालिख ही तो पूत रहे।। 


 जीत हुआ सत्य का फिर से असत्य एकबार फिर से औंधा पड़ा

 राग विलाप का गाकर अब वो अपने आप को कोश रहा।। 


 उस पिशाच के पिशाचत्व का भारत भर ने झेला दंश 

अताताई के महिमा मंडन में अब भी लगे कुछ सूअर वंश।। 


 उस सूअर का नर्क यहां है मिट्टी कीचड़ और विस्टा भी साथ 

उसको उस नर्क की क्यों हो चिंता जो झेल रहा पृथ्वी पर आज।। 


क्यों करें अपनी मुँह को गंदा उसको भोगना उसके कर्मो का हिसाब 

समय समय पर प्रभु जी उसको देते रहना उसका हिसाब।। 


 अब स्वागत की करें तैयारी प्रभु जी विराज रहे पुनः अपने धाम

 अवधपुरी की शोभा मे     लगने वाली है चार चाँद।।


 युगपुरुष जिसने भी अर्पण किये अपने योगदान 

भारत का हर बच्चा बच्चा मान रहा उनका एहसान।। 


 वीरों की यह पूण्य भूमि है समय समय पर आते भगवान

 अताताई और अधर्मी के कर्मो का हिसाब चुकाते खुद  भगवान।। 


 धर्म ध्वज के रक्षक हे दशरथ सुत अब धर्म पताका आपके साथ 

मानव में मानवता भरकर सत्य राह दिखाना अब आपके हाथ।।। 


कमलेश के कलम से