अपने सपनों को मत मारो

अपने सपनों का मत मारो,

मेहनत से तुम उन्हें विचारों।

मेहनत  तुमको करनी होगी,

स्वप्न की तब नींव बनेगी।


कदम कदम पर शिक्षा लेना,

हरदम यही परीक्षा देना।

अकेले तुमको चलना होगा,

मार्ग प्रशस्त करना होगा।


सीखते जाओ जो हो अच्छा,

कर्म योगी बनो तुम सच्चा।

लगातार तुम बढ़ते जाओ,

गिर उठ कर संभलते जाओ।


सपने हम को जिंदा रखते,

हरदम कुछ नया है कहते।

कभी भी तुम हार ना मानो,

होंसला अपना बुलंद जानो।


है तुममे वह शक्ति देखो,

सब कुछ कर सकते हो सोचो।

अंतर्मन में दृढ़ निश्चय लाओ,

अपने सपनों को मत मारो।


सपने मधुरिम होते सारे,

अंकुर बोओगे मिलेगा फल।

बस थोड़ा सा धीरज धारों,

अपने सपनों को मत मारो।


जब जब पूरे होते सपने,

संग चले आते सब अपने।

कल तक थे जो तुम रोकते,

आज है देखो पीठ ठोकते।।


             रचनाकार ✍️

             मधु अरोरा