दया (विजात छंद )

दया में भाव हो सारे

सुखों के बीज बो प्यारे 

बसी उर भावना मेरी,

करूँ आराधना तेरी ||


बिना   तेरे   रहूँ   कैसे,

बिना जल मीन के जैसे |

चले  आओ  सुनो  मेरी,

करूँ  मैं  वंदना   तेरी ||


पधारो श्याम जी प्यारे,

परम सौभाग्य हो द्वारे |

तुझे   परमार्थ  भायेगा,

नहीं कुछ व्यर्थ जायेगा ||


दया का भाव हो प्यारे,

सहारा  हम  बने  सारे |

मनुज काया नहीं तेरी,

जगत माया सभी मेरी ||


मिटा  दो  अंधकारों को,

जले  अब दीप द्वारों को |

सुनो अब धर्म  को धारो,

वचन तुम सत्य स्वीकारो ||


दया  ही वो  खजाना है,

जिन्हें सब पर लुटाना है |

दया  करना  सदा  दाता,

जुड़ा  तुमसे   रहे  नाता ||

_________________


कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश