कहानी - बाँझ

 मानसी की शादी को 8 वर्ष हो गए थे, लेकिन अभी तक गोद नहीं भरा| परिवार वाले अब उसे उलाहना देने लगे| पहले तो उसका पति निखिल परिवार वालों का विरोध करता था, लेकिन धीरे-धीरे निखिल भी अपनी मां पिता की भांति मानसी को जली कटी सुनाने लगा|

 1 दिन मानसी ने निखिल से कहा, चलो  जरा हम लोग डॉक्टर से अपना चेकअप करवा लेते हैं, कहीं किसी में कोई कमी तो नहीं| निखिल इस बात से काफी भड़क गया और बोला चलो मुझे पता है कि कमी तुम में ही होगी मुझ में कहीं से नहीं हो सकती| खैर डॉक्टर ने मानसी की जांच तो कर ली, जब निखिल की बारी आई तो उसने कहा मैं क्यों जाँच कराऊँ, जिस में कमी है उसने तो जांच करवा ली| खैर डॉक्टर ने शाम को रिपोर्ट देने  की बात बताई और अंदर चली गई| जैसे ही शाम हुयी मानसी  डॉक्टर के पास गयी  और रिपोर्ट मांगा| डॉक्टर ने कहा मानसी जी आपमें  तो कोई कमी है ही नहीं, आप मेडिकली पूरी फिट है| 

लेकिन यह सुनकर मानसी बहुत दुखी हो गई, उसे पता था यह बात उसके पति को काफी दुख पहुंचाएगा| उसने डॉक्टर से कहा कि प्लीज आप रिपोर्ट को चेंज कर दीजिए| काफी जिरह के बाद डॉक्टर ने रिपोर्ट चेंज कर दिया|मानसी शाम को  मुंह बना कर के अपने परिवार के पास आई और रिपोर्ट दिखा दी| फिर क्या था सब ने उससे सीधे मुहँ  बात भी नहीं कि उसकी सास ने तो निखिल की दूसरी शादी तक की बात कर दी, और 1 दिन ऐसा आया जब उसकी दूसरी शादी भी हो गई| निखिल ने मानसी से कहा तुम्हारा इस घर में कोई जगह नहीं तुम कहीं और जगह तलाश करो| 

स्वाभिमानी मानसी ने घर छोड़ दिया काफी कोशिश के बाद उसे एक सरकारी कार्यालय में काम मिल गया| करीब 10 वर्षो के बाद निखिल की मुलाकात एक बार फिर मानसी से हुई| निखिल मानसी से कुछ कहता तब तक एक बच्चा दौड़ता हुआ मानसी के पास आया और कहा मम्मी जल्दी चलो पापा ने तुम्हें बुलाया है| अब निखिल को इस बात का अहसास हुआ कि जिससे वह बाँझ  कहकर घर से निकाला था दरअसल वो  पूर्णतया ठीक थी कमी तो निखिल में थी तभी तो दूसरी शादी के उपरांत भी वह बाप नहीं बन पाया| निखिल अपराध बोध से ग्रसित दौड़कर मानसी के पास जाना चाहा उससे माफी मांगी चाही लेकिन तब तक मानसी अपने बच्चे और पति के साथ वहां से रवाना हो चुकी थी|

सविता सिंह मीरा 

जमशेदपुर 

झारखण्ड