सजे समर संग (हरिप्रिया छंद )

बनना नेक इंसान, बढ़ेगा जग में मान,

रहना देश की शान,शुद्ध भाव रखिये |

करो पितरों से प्यार, होगा सकल उद्धार,

मिलेगा बहुत दुलार,ज्ञान अधर चखिये ||


शिक्षा देश आधार, मिलते है सुसंस्कार,

जाने सकल संसार, ध्यान सदा रखिये |

काम क्रोध लोभ मोह, राग रंग सब विछोह,

छोड़ दो सारे कोह, भावना परखिये ||


करना देश पर नाज, हिमालय ही है ताज,

चलती लेखनी आज, परचम कर धरिये ||

जीवन में हो उमंग, रंगो प्रेम के रंग,

करना झूठ सब भंग,प्रेम गान करिये ||


देश प्रेम बोल गीत, साध साधना सुप्रीत,

सजे समर संग मीत, सौम्य स्नेह भरिये |

धन्य धरा मातु प्रेम, करती सदा सम क्षेम,

धरो ध्यान गान नेम,शौर्य साज करिये ||____________________________


कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश