हिन्द (हरिप्रिया छंद)

हिन्द देश के जवान,   बढ़ा रहे देश मान,

माटी अपनी महान, प्राणों को निज वारे |

भूल बैठे निज द्वार,बह रही गंगा धार,

धोती सारे विकार,  प्रेम मन धारे ||


करते सैनिक कमाल,होते दुश्मन निढाल,

होती जनता निहाल, नमन उन्हें करिये |

सदा बढ़े आन बान, भारत मेरा जहान,

देश धर्म है समान,प्रेम शीश धरिये ||


धरती करती पुकार, करों सब देश  दुलार,

भरना सदा तुम हुँकार, रक्षा है करते |

कर लो सब खूब नाज,मस्तक पर सजे ताज,

रखते देश की लाज, शीश भार धरते ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश