सांवरिया

सांवरिया के प्रेम में,सुध बुध भूली गोपियां

प्रेम रस से सराबोर हो,नृत्य करती गोपियां


लीला गिरधर की न्यारी,पायों रूप अति सलोना

अधरों पर सजी बांसुरिया ने,सुख चैन सब छीना


ग्वाल बाल संग मिलकर,माखन मिश्री चुराना

पकडे जाने पर करें ठिठोली,अबोध बन जाना


मैया जोहती बाट डगर पर,मटकी फोडे कान्हा

तंग आ गयी सुन सुनकर,मैया रोज नया उलाहना


कानन कुंज में फिरै भटकते, ढूंढे मात यशोदा

अभी यहां तो वहां दिखते, अनुपम उनकी लीला


थककर आंचल में सो जाए,जाए मैया बलिहारी 

टीका लगाकर काजल का,नजर लाल की उतारी


जमुना तीरे बजाय बांसुरी,नाचै चंचल राधा रानी

कान्हा संग रास रचायौ, होकर मगन प्रेम दीवानी


गोपियों को छेडे कन्हैया, फिर मंद मंद मुस्काए

कपड़े चुराकर छुप जाते, कैसे नटखट कहलाए


स्वरचित एवं मौलिक 

अलका शर्मा, शामली, उत्तर प्रदेश