मन मोहक लड्डू गोपाल

छोटा मनमोहक मेरे लड्डू गोपाल,

आत्मा का मंथन करे है कमाल।

सबको मोहे मुस्कान इतनी प्यारी,

ब्रिज वासियों में लल्ला की छवि न्यारी।

माथे पर मोरपंख और मुकुट सजे,

हर रोज माखन मिश्री का भोग लगे।

नैन कजरारे,अखियों से जादू करे,

कुंवर मोहन रोज सज संवर मन हरे।

देख लड्डू को उमड़े प्रेम का सागर,

भाव से छलके है प्रीति का गागर।

तुम्हरी एक मूरत बसी है अखियन में हमारी,

मन न लगे तुम बिन छोटे बांके बिहारी।

अंशिता दुबे

लंदन