ज्ञान, भक्ति, योग और पर्यावरण के महान चिंतक थे भगवान श्रीकृष्ण: शीतल टण्डन

जिला व्यापार मण्डल द्वारा जन्माष्टमी के कार्यक्रमों की श्रृंखला में विशेष बैठक का आयोजन

सहारनपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2022 के महापर्व पर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल की जिला इकाई के तत्वावधान में स्थानीय रेलवे रोड पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जहां इस बात की आवश्यकता पर बल दिया गया कि गीता में दिये गये भगवान श्रीकृष्ण के संदेश मानव जीवन का सार है ज्ञान, भक्ति, योग और पर्यावरण के महान चिंतक भगवान श्रीकृष्ण के बारे में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन ने कहा कि आज जहां भारत ही नहीं अपितु सारे विश्व में पर्यावरण की समस्या विकट रूप धारण कर रही है, और यह चिंतन का विषय है कि प्रदूषित पर्यावरण से कैसे बचा जाये। प्राचीन काल से ही पर्यावरण के बारे में जागरूकता दिखायी गयी है। भगवान कृष्ण का कहना है कि ‘‘देखो ये वृक्ष कितने भाग्यवान है, इनका सारा जीवन दूसरो की भलाई करने में समा जाता है, ये स्वयं न केवल हवाओं के झोके, वर्षा, धूप व पाला सब कुछ सहते हैं, साथ ही हम लोगों की उनसे रक्षा भी करते हैं। मैं कहता हूं कि इनका जीवन सर्वश्रेष्ठ है। 

श्री टण्डन ने कहा कि धरती पर श्रीकृष्ण का अवतरण सर्वाधिक मनोहर व आश्चर्यजनक घटना है, क्योंकि वे पूर्णता के प्रतीक है। एक ओर जहां उन्होंने मनुष्य जन्म की सीमाओं को स्वीकारा वही उस सत्य से भी परिचय कराया जो जन्म और मृत्यु से परे है। उन्होंने कहा कि कृष्ण के जीवन से हमें विविध दर्शन व जीवन का बोध होता है। इनमें कृष्ण का पर्यावरण चिंतन, योगी, तपस्वी, महान पुरूषार्थी, कर्मवादी, दार्शनिक, प्रजापालक नेतृत्व करने वाले अवतारी पुरूष लीलाधारी, लोकरंजक, धर्म संस्थापक व साधुओं के रक्षक व दुष्कर्मी का नाश करने वाले श्रीकृष्ण के अनेक रूप है।

 सम्पूर्ण मानव जीवन के लिए श्रीकृष्ण का अर्जुन को गीता में कर्म का संदेश आत्मा व परमात्मा के रहस्य को समझाने वाला है, वही ज्ञान, भक्ति व योग का रहस्य भी भगवान कृष्ण का अनुकरणीय संदेश है। श्री टण्डन ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की सिखायी गयी बातें इस युग में भी इतनी महत्वपूर्ण हैं, जिसकी महाभारत काल के लिए थी। उन्होंने अनुशासन में जीने, व्यर्थ चिंता न करने और भविष्य की बजाय वर्तमान में जीने की बात कही है। 

भगवान श्रीकृष्ण जीवन में हमेशा जरूरी बदलावों के पक्षधर रहे, बनी बनायी लकीर पर चलने की बजाय मौके की जरूरत के हिसाब से सकारात्मक भूमिका बदलना ही जीवन का श्रेष्ठ मार्ग है। वे हमारी संस्कृति के विलक्षण महानायक हैं।

श्री टण्डन  ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में कई प्रसंग ऐसे आते है जिससे पता चला है कि वे पर्यावरण के कितने प्रेमी हैं। वृक्षों को उन्होंने मानव जीवन का आदर्श माना था और उनके द्वारा भारत वर्ष को पर्यावरण का चिंतन भी दिया गया। गंगा, यमुना के निर्मल प्रवाह व जल संरक्षण की योजना सरकार ने तो हाल ही में बडे स्तर पर शुरू की है, परंतु श्रीकृष्ण ने द्वापर में भी यमुना के जल को दूषित न होने का व्यापक प्रयास किया था।

 क्योंकि भागवत पुराण के अनुसार यमुना का जल इतना प्रदूषित हो गया था और वह गर्मी में इतना खौलता था जिस कारण यमुना के ऊपर उड़ने वाले पक्षी भी झुलस जाते थे। इसका कारण कालिया नामक नाग था। भगवान श्रीकृष्ण ने इस नाग का विनाश कर पर्यावरण विरोधी तत्व को यमुना ने बाहर निकाल दिया था। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज के सभी वर्गो के लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर पर्यावरण दिवस के रूप में मनाते हुए युद्ध स्तर पर अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ बनायें और स्वच्छ भारत मिशन और जल संरक्षण के कार्यक्रमों को सफल बनाने के साथ-साथ अधिक से अधिक औषधि युक्त पौधे लगायें।

बैठक में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन, जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा , जिला कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मेजर एस.के.सूरी, पवन गोयल, गुलशन नागपाल, संदीप सिंघल, अनिल गर्ग, कर्नल संजय मिडढा, सतीश ठकराल, संजय महेश्वरी, मुरली खन्ना, बलदेव राज खुंगर, संजीव सचदेवा, अशोक मलिक,प्रवीन चांदना, भोपाल सिंह सैनी आदि व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।