धार्मिकता की आड़ में देश को गर्त में ढकेलना ठीक नहीं - राम गोविन्द चौधरी

लखनऊ ( अनिल त्रिपाठी / दीपिका पाठक ) : धर्म स्वयं धारण किया जाता है और उसका पालन व्यक्तिगत होता है लेकिन वर्तमान में धार्मिकता का उन्माद फैलाकर देश के असल मुद्दों पर पर्दादारी की जा रही है जिसके गंभीर परिणाम देख को भोगना पड़ेगा उक्त बात प्रख्यात समाजवादी नेता पूर्वांचल के गाँधी राम गोविन्द चौधरी ने कही।

श्री चौधरी ने कहा कि राजनीति में बाजारीकरण का हावी होना अच्छे जन सेवकों की कमी कर दी है। धनबल और राजनैतिक भ्रष्टाचार ने देश कमी आम जनता में निराशा का वातावरण पैदा किया है। श्री चौधरी ने कहा कि राजनीति में विचार शून्यता की कमी के चलते राजनीति ने सादगी - शालीनता और ईमानदारी का टोटा हो गया है। उन्होंने युग जागरण से बात करते हुए कहा कि हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि देश के नौजवान शीघ्र ही वर्तमान राजनैतिक परिद्रश्य को बदल देंगे।

श्री चौधरी ने कहा आज महंगाई चरम पर है बेरोजगारी भी बढ़ी है देश के सरकारी उपक्रम औने - पौने दामों पर कुछ लोगों को बेचे जा रहे है।

जब सरकारे अपनी अभद्रता को छुपाने के लिए झूठ - फरेब का सहारा लेकर धार्मिक उन्माद पैदा करें तो समझो देश पर मुसीबत खड़ी हो गयी है। उन्होंने कहा कि निरंकुश सरकारों पर सड़कों से ही अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों की क्षेत्रियता के चलते नेता आसानी से अपना बयान बदल लेते है और जनता वास्तविक्ता समझे बिना उनके जाल में फंस जाती है।  जिसे हर हाल में रोकना होगा । इसके लिए सभी को घरों से बाहर निकलना होगा।

श्री चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसान सूखे से तबाह हो गए तो कही बाढ़ ने उसे तबाह कर दिया लेकिन सरकार उन्हें राहत देने के बजाय कोरोना काल की तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया। श्री चौधरी ने कहा कि भाजपा शासन काल में महंगाई चरम पर पहुंच गई है बेरोजगारी के चलते देख का युवा निराशा का शिकार हो गया भ्रष्टाचार चरम पर है। इन सबसे निजात दिलाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही।