दीवाना है दर्द मेरा

आज भी आंखों के आगे वो मंज़र है

यादे चलाए दिल पर खंजर है

आंखों में आंसू-ए सैलाब समंदर है

जख़्म ही जख़्म दिल के बस अंदर है।।


भूले ना भूल पाती आज भी कुछ मैं 

दिलासा दिलाती अपने दिल को ही मैं 

इन हालातों ने मुझे पत्थर का बनाना चाहा

बन ना पाई पत्थर नाजुक दिल मुझमें समाया


आज भी आंखों के आगे वो मंज़र है

यादे चलाए दिल पर खंजर है।।


सच वक्त दर वक्त मेरा दर्द बढ़ता ही गया

यादों कि काली स्याही में दर्द ही भिगोता गया

लिखना चाहा दर्द जब ये जख़्म करता ही गया

दीवाना दर्द मेरा दिल में मेरे घर करता गया।।


आज भी आंखों के आगे वो मंज़र है

यादे चलाए दिल पर खंजर है।।


कभी हसता था ये जमाना मेरे ज़ख़्मी जज़्बातों पर

हर जख़्मी जज़्बात में मेरे कलम रंग भरता ही गया

पढ़े जख़्मी हालात मेरे जब इस जमाने ने दिल से

आज यही जमाना जख़्म पर वाहवाही करता गया।।


आज भी आंखों के आगे वो मंज़र है

यादे चलाए दिल पर खंजर है।।


वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र