वीआईपी दर्शन के नाम पर लूट

सावन में शिव मंदिरों में काफ़ी भीड़ होती है,जिसे देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर में सुगम दर्शन के लिए अब साढ़े सात सौ लगेंगे।ये हाल सिर्फ़ किसी एक मंदिर तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश के कई बड़े मंदिरों का यही हाल है।

भगवान के दरबार में भी ये अमीर गरीब के हिसाब से भेदभाव करते है और खुद को धर्म धुरंधर कहते है।

सनातन धर्म को इन्हीं जैसे जाहिल फरमानों कि वजह से हमेशा से क्षति पहुंचता रहा है।

लोग इन्हीं सब का उदाहरण देकर अन्य धर्म में परिवर्तन करवाते है।

ऐसे ज़ाहिल अब भगवान के दर्शन का भी ठेका लेने लगे है,सच ही है कि आजकल के लगभग बहुत से पंडें,पुरोहित सब सेल्समैन हो गए है।सब भगवान के नाम पर अपना उल्लू सीधा करना चाहते है।

आखिर किस जगह शास्त्र में ये नियम लिखा है कि पैसे देकर भगवान जल्दी दर्शन देंगे या पैसे देकर मंदिर में आपको जाने दिया जाएगा?

क्या मंदिर कोई सिनेमाघर है,जिसने भगवान नाम कि मूवी देखने के लिए टिकट लेना पड़ेगा,सिनेमाघर में तो फिर भी दो घंटे बैठने को मिलता है यहां तो दो मिनट में ही "आगे बढ़ो,आगे बढ़ो"

ये सुविधा देश के हर बड़े मंदिरों में उपलब्ध है,जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।

ऐसे मंदिरों में दर्शन के लिए कोई न जाएं जहां पैसे देकर दर्शन कि सुविधा हो या कोई वीवीआईपी सुविधा हो।

जब भगवान सबके है तो भगवान के घर में अमीर शान से कैसे एक मिनट में गर्भगृह में पहुंच के दर्शन कर लेता है और श्रद्धा से भरे भक्त घंटों लाइन में खड़े हो कर दूर से बस एक झलक के लिए भी तरसते है, ये सरासर अन्याय है।

सनातन संस्कृति में ऐसे किसी भी दुस्साहस को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हमारे यहां तो प्रसाद के बिना मंदिर के बाहर नहीं जाने दिया जाता था वो भी निशुल्क, आज प्रसाद भी खरीद के खाना पड़ता है,ये किस संस्कृति कि तरफ हम भाग रहे है?

अगर आप इस आधार पर कहते है कि सनातन महान है तो यकीन मानिए आपको अपने दिमाग़ का जांच किसी अच्छे हॉस्पिटल के अच्छे डॉक्टर से कराना चाहिए।

सनातन महान है,था और रहेगा लेकिन कुछ जाहिलो कि वजह से इसके महानता पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है जिसे हटाना अति आवश्यक है।

शिवम् मिश्रा "गोविंद"

मुंबई महाराष्ट्र