याद तेरी

 परदेस बसे हो मेरे साजन,

नैना मेरे नीर बहाए।

उमड़ घुमड़ कर बादल आए

वह तो मुझको बहुत तरसाए।


बिजुरिया चमके चम चम चम,

वह तो मुझको बहुत डराए।

आजा  ना तरसा मुझको साजन,

तेरी याद हर दम है आए।


सावन के देखो पड़ गए झूले,

सारी सखियां झूला झूले।

पपीहा पीहू पीहू है गाए।

मेरे मन को बहुत सताए।


नैनों से मेरे बूंदे बरसे

प्रियतम तेरी याद में तरसे।

क्यों ना आया तू बेदर्दी,

काहे दिखाई इतनी बेरुखी।


मौसम भी देखो मुझे सताए

वह तो मेरा जी है जलाए।

बिरहाग्नि को और बढ़ाएं,

तेरी हर क्षण याद दिलाए।।


        रचनाकार ✍️

        मधु अरोरा