सहारा (कुण्डलिया )

एक  सहारा  ईश  है, वही  निभाए  साथ |

संकट की जब हो घड़ी, नहीं छोड़ते हाथ ||

नहीं छोड़ते हाथ, ह्रदय  से उन्हें पुकारे |

भव सागर से पार, लगा दें नाव किनारे ||

कहती स्वप्निल बात, सभी को मिला किनारा |

दर्शन   दे   दो   नाथ, आप  ही  एक  सहारा ||


बनों सहारा दीन का, थामों  उनके  हाथ |

आप निभाना कष्ट में, देकर उनका साथ ||

देकर उनका साथ, धर्म की रीत निभाना |

चैन  मिले  आराम,प्रेम  से  उन्हें  बुलाना ||

कहती स्वप्निल आज, कभी मत करो किनारा |

कोई   दे  आवाज, सदा   तुम   बनो   सहारा ||


मिला सहारा आपका, खुला ज्ञान का द्वार |

राह दिखाई सत्य की, गुरुवर  का आभार ||

गुरुवर  का  आभार, राह  को  वही  दिखाते |

सृजन करे सब आज, गीत को है मिल गाते ||

कहती स्वप्निल आज, तुच्छ को मिला किनारा |

बनी   लेखनी  धार , आपका   मिला   सहारा ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ

उत्तरप्रदेश