पापा पर ऐसा असीम प्यार !

पापा है अनमोल, जब देखुं,

लिखते रहते, अखबारों में

दिखते रहते, नेह लुटाते हैं,

जरा-जरा बातों पर घबराते,

अंदर ही अंदर चिंता करते,

सोचते रहते लिखते जाते,

चरैवेति, चरैवेति, चरैवेति,

अनवरत चलती लेखनप्रभा,

मन नहीं भरता, सदैव लिखा,

उनका जन्मदिन है आज और

हमने ही सीखा उनसे सदैव रखें,

भलाई का विचार, सबकी करें,

मदद दुआएं आपोंआप मिलेंगी,

दिल में खुशियां बरसेगी, फूल

खिलेंगे, कली-कली बिखरेगी,

मन में होगा उजास, यही पल,

जीवन में होंगे खास देते ऐसे

समृद्ध विचार, गर्व क्यों ना हो,

उन पर, हमें भी आता अपने

पापा पर ऐसा असीम प्यार !

  - नेहा ठाकुर " नेह "

    इंदौर, मध्यप्रदेश

मो. 6264366070