प्रीत पुरानी

मेरी तुझसे कोई प्रीत पुरानी लगती है ,

मेरी हर धड़कन तेरी दीवानी लगती है

दूर रहो या पास मेरे मुझे बुलाती लगती हैं,

पास होने से तेरे सजीव जवानी लगती है

मेरी तुझसे कोई प्रीत पुरानी लगती है।

एहसास तुम्हारे खास लगे

धड़कन की रवानी लगती हो।

फूलों सी महक तुम्हारी लगे

जानी पहचानी लगती हो।

मेरी तुझसे कोई प्रीत पुरानी लगती है

हाले दिल अपना  कहो मुझसे

ना राज कोई छुपाओ जी

प्यार तुम्हें मैं करता हूं

धीरे से तुम कह जाओ जी।

ख्यालों में तुम ख्वाबों में तुम

अनमोल बड़ी तुम लगती हो

जन्नत की हूर कभी मुझे

सुहानी गजल सी लगती हो।

आओ बांट ले  सुख-दुख अपने प्रेम दिवानी लगती हो

राधा सा मुझे प्यार करो मीरा की भक्ति लगती हो।

प्रीत का आधार जीवन का सार लगती हो

जब तुम साथ होते हो मेरे सुलझी जिंदगानी लगती हो।

       रचनाकार ✍️

       मधु अरोरा