कब तक यह बेगानी त्रासदी मध्यप्रदेश के पेंशनरों के साथ खड़ी रहेगी....!

हमारे अपनों में से ही हैं, जो मिलती रहे जलालत तो क्या दवा देते हैं, उन्हें दयावान बताकर मरहम लगा देते हैं। सदाऐं आती है जब उनके सितम की, ये ऐसे शख्स हैं की बीच-बीच उनकी वाहवाही का परचम लगा देते हैं। गुनाह उनके हो जायें बहुत, तो भी उनकी सदाकत देते हैं, अपने ही घर में लगी आग को आतिशबाजी का मजा देते हैं। कर रहे सारे बगावत तो, झूठी उम्मीद लगा देते हैं। चाटूकारिता सीखिए, इनसे, गर डला गले में फंदा हो, तो गुलों का हार बता देते हैं। जहां दयाभाव का बूंद भर दिखाई ना देता हो, वहां ये समंदर बता देते हैं।

क्या बताऐं क्यों जकड़ी हुई हैं पेंशनरों की महंगाई राहत, दो सलाखों के बीच। कब तक ऐसा रहेगा। कब तक यह बेगानी त्रासदी मध्यप्रदेश के पेंशनरों के साथ रहेगी। क्या आला मसनददार बता सकते हैं। कोई तो महंगाई राहत को दो सींखचों के बीच सांकलों के बंधन से छुड़ा दो। अरे निकाय, निगमों, पंचायतों के चुनावों की आचार संहिता की जकड़न भी अब खुल चुकी। मसनदनवीस क्या भुल चुके हैं। धैर्य अब टूटने लगा हैं। लोकतंत्र में ऐसा कुठाराघात पेंशनरों के साथ क्यों, बताइए सबको खुश रखने वाली सल्तनत के वफादार। यह ज्यादती के समान नहीं हैं क्या।

अब नगरीय निकायों, पंचायतों के चुनाव हो गए। अब मध्यप्रदेश की सरकार को पेंशनरों को महंगाई राहत देने में

कोई कठिनाई नहीं होना चाहिए। जरा भी विलंब नहीं करना चाहिए। जब महंगाई रूक नहीं सकती तो फिर महंगाई राहत रोके जाने का कोई औचित्य नहीं हैं। प्रदेश के लाखों पेंशनर्स और उनके परिवार बदहाली में जी रहे हैं। गुहार लगा रहे हैं कि अब तो जागिए सरकार। पेंशनर राहत रोकना बिलकुल नाइंसाफी हैं। पिछली विपरीत सरकार के बाद से इनकी सरकार आजतक बहुत अच्छी चली है, बहुत काम हुए हैं जिनके लिए धन की कोई कमी नहीं आई,  बस एक पेंशनरों का काम ही रूका है, इसमें भी धन की कमी आड़े नहीं आ रही हैं, सरकार देना चाहती है, मगर  जो अड़ंगा लगाया जा रहा हैं, वह क्लियर नहीं हो रहा, खत्म नहीं हो रहा, माकूल और मुकम्मल प्रयासों की कमी हैं, तो रोड़ा खत्म करना सरकार का कार्य है, जिससे पेंशनरों को बढ़ी महंगाई राहत मिले।

मन दुखी हैं हमारे प्रदेश के सभी पेंशनर्स परिवारों का उनकी व्यथा गंभीर पीड़ा बन चुकी हैं। सारे कार्य हो रहे हैं बेहतर, घोषणाएं हो रही हैं, फ्री की सौगातें बंट रही हैं, महंगाई का हथौड़ा पड़ रहा हैं पेंशनरों पर और पेंशनर्स अपने पेट की थाली बजा रहे हैं अगर पेट खाली हो तो कब तक भूखे रखेंगे परिवार को कर्ज लेकर परिवार पालना पड़ेगा। सरकार भी जब बजट में प्रावधान रख के चलती हैं तो व्यवस्था भी कहीं से भी करें। जैसे सारे खर्चो के लिए अभी कर रही है।

पेंशनरों के प्रति ऐसी संवेदना रखते हो, टेक्स, जीएसटी और महंगाई ये सब बढ़ाने के पहले रोक क्यों नहीं ली जाती। धैर्य की सीमा इसलिये पार हो गई है श्रीमानजी।  दूसरी ओर खुले हाथों खर्चे हो रहे हैं, गैर जरुरी खर्चे और सौगातों पर धन खर्च हो रहा है और पेंशनरों को राहत नहीं मिल रही है। समझ नहीं आता की हमारे प्रदेश में आर्थिक तंगी है क्या ? अन्य राज्यों और केंद्र में पूरी महंगाई राहत मिल रही हैं! संवेदनशील और संवेदना विहीन कौन हैं कहां हैं। यह हम क्यों सोचें। इतना सब्र देखकर तो अब महंगाई भी पेंशनरों का मुंह चिढ़ा रही हैं।

पेंशनर्स की व्यथा कैसे हो दफा, हुक्मरान, मसनद पर बैठे सर्वोच्च सत्तानसीन पेंशनर्स भी इंसान हैं, आर्थिक विषमताओं की बीमारियों से, कमजोरियों से घिर गये हैं, उनके ईलाज के लिए बढ़ी महंगाई राहत दो, ऐसा पुण्य कमाओं, उनकी हाय मत लो, उनकी वाहवाही लुटो, दुआऐं लो।

- मदन वर्मा " माणिक "

इंदौर, मध्यप्रदेश

ईमेल- vmadan2525@gmail.com