प्रेम

प्राण पण से निभाया गया प्रेम पर,

स्वार्थ परिपूर्ण था प्रेम जाया गया ,

प्रेम शाश्वत हुआ कृष्ण-राधा हुआ

वासना से रहित जब निभाया गया।

प्रेम आभास है एक अहसास है,

प्रेम अनुपम बड़ा एक वरदान है।

प्रेम तो भक्ति का एक भावार्थ है,

प्रेम में ही निहित मोक्ष का ज्ञान है‌।

प्रेम पूजा हुआ प्रेम अर्पण हुआ ,

प्रेम होना हुआ ईश आधार है।

त्याग माया सभी त्याग तू राग भी,

प्रेम उर धार ले ईश का द्वार है।

भाव पुलकित हुए उ‌र सुवासित हुआ,

प्रेम से रोम को जब सजाया गया।

प्रेम शाश्वत हुआ कृष्ण-राधा हुआ

वासना से रहित जब निभाया गया।‌

ये डगर प्रेम की तो नहीं है सरल,

हर कदम पर मिला है गरल ही गरल।

कृष्ण हो राम हो वीर हो बुद्ध हो,

भाग्य सबके कुटे ज्यों कुटे है खरल।

प्रेम देता रहा दर्द उपहार में सह लिया

'ज्योति' जिसने वही राम है।

नींव जग की बना बन गया ईश वो,

प्रेम जिसने किया वो बना श्याम है।

मातु तुमको यहांँ ईश की पूर्ति को,

स्वर्ग से इस मनुज लोक लाया गया ।

प्रेम शाश्वत हुआ कृष्ण-राधा हुआ,

वासना से रहित जब निभाया गया।


ज्योति जैन 'ज्योति'

कोलकाता,पश्चिम बंगाल

8514044018