आखिर क्यों की गयी पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना

जिलाधिकारी 4 सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा पेश करे

सहारनपुर। पूर्व एमएलसी एवे खनन कारोबारी मा.उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर गैंगस्टर एक्ट में जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश को स्थ्गित कर जिलाधिकारी को चार सप्ताह में व्यक्तिगत हल्फनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

ज्ञातव्य हो कि पिछले कई माह से जिस प्रकार जिला प्रशासन हाजी इकबाल पर एकतरफा कार्यवाही कर रहा है, इसी मामले को लेकर खनन कारोबारी ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जहां से उसे न्याय की पूरी-पूरी उम्मीद है। जानकारी के अनुसार गत दिनों थाना मिर्जापुर पुलिस ने पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल को गिरोहबन्द अपराधी मानते हुए उनके भाई, बेटों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने 12 मई 2022 को आदेश दिया था कि आरोपियों के विरूद्ध 2 माह तक कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी और आरोपी इसी अवधि में जिले स्तर की अदालत में अपना मामला निपटा लेंगे। 

हाईकोर्ट में हाजी इकबाल के अधिवक्ता आई.बी.यादव ने कोर्ट को बताया कि 12 मई 2022 के आदेश की जानकारी होने के बावजूद 13 मई 2022 को कुर्की का आदेश किये। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत की अर्जी 12 मई को इस शर्त के साथ खारिज कर दी गई थी कि मामले के गुणदोष को देखते हुए आदेश पारित होने की तारीख से दो माह की अवधि के लिए आवेदकों के खिलाफ कोई कार्यवाही न की जाये। अधिवक्ता ने जानकारी दी कि उसके द्वारा उसी दिन जिलाधिकारी कार्यालय को अवगत करवा दिया था किन्तु इसके बावजूद 13 मई 2022 को जिलाधिकारी द्वारा जब्ती आदेश पारित किया ओर उ.प्र. की धारा 14(1) के तहत आवेदक की कुछ सम्पत्ति जब्त कर ली है।

आदेश 13 मई 2022 के माध्यम से डीएम ने 23 मई 2022 को प्रेस विज्ञप्ति सह आदेश जारी किया है जिसके द्वारा यह कहा गया है कि आवेदकों की जब्त सम्पत्ति 2 जून 2022 यानी लगभग 8 दिनों के बाद नीलामी के लिए मंगाई गयी है। आवेदकों ने 31 जून 2022 को जिलाधिकारी के समक्ष यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी कि इस न्यायालय द्वारा पारित कोई दण्डात्मक कार्यवाही आदेश आज की तिथि तक प्रचलित नहीं है इसलिए मुक्ति आवेदन पर विद्धान अधिवक्ता द्वारा निर्णय दिये जाने तक कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा लेकिन इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश की अनदेखी करते हुए नीलामी की कार्रवाई की गयी है। 

हाईकोर्ट ने कहा कि ययह संदेह से परे है कि आवेदकों ने इस अग्रिम जमानत आवेदन के माध्यम से इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन आवेदकों के खिलाफ कोई दंडात्मक उपाय नहीं करने के लिए इस न्यायालय के अवलोकन के बाद, राज्य को किसी भी आदेश को पारित करने से बचना चाहिए था। जब तक 12 मई 2022 के आदेश को संशोधित नहीं किया गया था। इसलिए जिलाधिकारी द्वारा पारित जब्ती आदेश 13 मई 2022 कीे अवधि के लिए स्थगित रखा जाएगा। आज से चार सप्ताह के भीतर जिला मजिस्ट्रेट वर्तमान मामले के विवरण को उसकी समग्रता में बताते हुए अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करेंगे। यह मामला 23 अगस्त 2022 को सूचीबद्ध के रूप में पोस्ट किया गया है।