सावन (चौपाई छंद )

सावन बरसे बादल यारा |

लगता झूला अनुपम प्यारा ||

घुमड़ -घुमड़ कर बरसे बदरा |

देख घटा अब डरता जियरा ||

डाल -डाल पर पड़ता झूला |

सोंधी खुशबू में सब भूला ||

शिव की महिमा गाओ प्यारी |

लीला उनकी सबसे न्यारी ||

सावन साजन चूड़ी लेना |

पीहर हमको जाने देना ||

धानी चुनरी ओढ़े आऊँ |

देख तुम्हें मैं अब शर्माऊँ ||

भजना शंकर है अविनाशी |

भोले हैं घट घट के वासी ||

शीश जटा पर गंग विराजे |

नाग गले हैं उनके साजे ||

काले बादल जब घिर आये|

बच्चे प्यारे शोर मचाये ||

सबके मन में हर्ष समाये |

सावन ऋतु  से मन हर्षाएं ||

सावन  सारी खुशियाँ  लाता |

पत्ता पत्ता  खिलता जाता ||

नदी सरोवर ताल तलैया |

ता -था  थैया नाचे भैया ||

कागज़ की तुम नाव बनाना |

जब घूमे तब लगे सुहाना ||

खन -खन चूड़ी बजती जाये |

 मिलन की खूब आस लगाये ||

नैनों को ठंडक मिल जाती |

सावन में जब बदली छाती ||

 रचती हीना गहरी न्यारी |

समझो सखियाँ वह है प्यारी ||

सावन मास महीना प्यारा |

लगता सारा जग है न्यारा ||

महके बगिया चम्पा फूले |

सखियाँ सारी झूला झूले ||

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कवयित्री

कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "

लखनऊ उत्तरप्रदेश