कारगिल

याद आते हैं जब वह क्षण,

चलचित्र सामने आ जाता ।

कारगिल के युद्ध को याद कर,

अश्रु मेरे नैनों में आता।

उनके उस बलिदानो से,

विश्वासघात हुआ देखो।

छूटाता न वीरों का साथ,

विश्वासघात किया ना होता।

छक्के दुश्मन के छुड़ा देते,

कर्ज तूने चुकाया मां का।

दूध का कर्ज उतारा तूने।

देश का कर्ज उतारा तूने,

मां भारती का लाल बन।

बहना ने देखो है बोला,

राखी का कर्ज चुकाया तुमने।

पत्नी की मांग का सिंदूर,

न्नहा भी तेरा रो रहा।

दरवाजे को राह निहारे

कब आओगे पापा प्यारे।

वीर जवान जो चले गए,

क्या कहूं साथ छूटा देख।

हर किसी न था क्रंदन किया,

कारगिल पर विजय से देखो

कहीं मातम ,

कहींखुशी की घड़ीछाई थी।

किसी का लाल, तिरंगे में,

कई खुशियों की अंगड़ाई थी।

कैसे भूले उस गाथा को,

नैन मेरे भर आते हैं।

नमन है उन वीरों को ,

जो देश के काम आते हैं।


        रचनाकार ✍️

        मधु अरोरा