चिलमन

सरेआम ना हो जाये मोहब्बत हमारी,

उसपर चिलमन का पहरा रहने दो।

डर लगता है ज़माने की रुसवाईयों से,

सितमग़र इस सितम का पहरा रहने दो।


है दुनियां की नज़र में इश्क़ हमारा गुनाह,

तो इस गुनाह को बेतकल्लुफ़ करने दो।

चिलमन की आड़ में छुपा के चेहरा,

दीदार-ए-एहसास  तुम्हारा करने दो।


शगुफ़्ता ना थी पहले जिंदगानी मेरी,

तुम्हारे तबस्सुम के फूल खिलने दो।

माना बहुत तड़पाती है ये चिलमन,

पर आँखों में शर्म का पर्दा रहने दो।


तमन्ना किसे है अब सोने और जागने की,

अपने हसीन ख़्वाब में ही रहने दो।

माना मुफ़लिसी बहुत है ज़माने में,

तुम्हारी मोहब्बत का तलबगार रहने दो।


साहिल के तमाशबीन इमदाद नहीं करते,

बाहों के सहारे तुम मुझे दरिया पार करने दो।

इक खुशनुमा डोर से बंध गये हो तुम,

गुज़ारिश है इब्तिसाम सदा रहने दो।


                रीमा सिन्हा (लखनऊ)