जेल अफसर केस, अंतिम आदेश 21 जुलाई को

लखनऊ। लखनऊ जेल के अफसरों द्वारा जानबूझ कर तमाम सामान व अभिलेख गायब करने के आरोप के संबंध में अमिताभ ठाकुर द्वारा एफआईआर दर्ज करने हेतु धारा 156 (3) सीआरपीसी में दिए गए प्रार्थनापत्र कर अंतिम बहस हो गयी है और सीजेएम रवि कुमार गुप्ता ने इसपर फैसला सुरक्षित रख लिया है. फैसला 21 जुलाई 2022 को सुनाया जायेगा। 

अमिताभ ठाकुर ने अपने वाद में कहा था कि उनके लखनऊ जेल में रहने के दौरान उन्होंने विभिन्न प्राधिकारियों के लिए कुल 545 पत्र जेल प्रशासन को सौंपे जिनमे कुछ को छोड़ कर ज्यादातर पत्र गायब हैं. इसके साथ ही उनके कई अन्य अभिलेख व सामान भी जेल प्रशासन द्वारा उनके बार-बार अनुरोध के बाद उन्हें नहीं सौंपे गए हैं तथा गायब कर दिए गए हैं। 

अमिताभ ने कहा कि उनके बार-बार अनुरोध के बाद भी जानबूझ कर उन्हें प्रताड़ित करने तथा क्षति पहुंचाने के लिए उनके सामान व अभिलेख गायन किये गए हैं. अतः उन्होंने इसके संबंध में समुचित धाराओं में एफआईआर की मांग की है।