खतरनाक बीमारी स्क्रब टाइफस से दो लोगों की मौत, जानिए इसके लक्षण और फैलने का कारण

केरल में इन दिनों एक बहुत ही खतरनाक बीमारी फैल रही है। रविवार को स्क्रब टाइफेस से पीड़ित 38 वर्षीय महिला की मौत हो गई है। खबरों की मानें, तो दो दिन पहले ही महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। केरल में इस बीमारी के कारण बीते दिन में ये दूसरी मौत हुई है। इससे पहले भी तिरुवनंतपुरम जिले की वर्कला में स्क्रब टाइफस के कारण 15 वर्षीय अश्वथी नाम की मौत हुई थी। अश्वथी अपनी 10वीं कक्षा के बोर्ड परिक्षा के परिणामों का इंतजार कर रही थी। आपको बता दें कि यहां की स्थानीय भाषा में इस बीमारी को चेल्लू पानी के नाम से भी जाना जाता है। 

क्या होता है स्क्रब टाइफ्स?  

स्क्रब टाइफ्स एक संक्रामक बीमारी है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नाम के एक खतरनाम बैक्टीरिया के कारण होती है। डॉक्टर्स के अनुसार, यह बीमारी संक्रमित चिगर्स के काटने से इंसानों में फैलती है। इसे बुश टाइफस भी कहा जाता है। यह एक तरह की वेक्टर जनित बीमारी होती है। चिगर्स का लार्वा स्टेज होता है, जो चूहों, गिलहरियों और खरगोशों जैसे जानवरों से इंसानों तक पहुंचता है। इस बीमारी का यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो इंसानों की जान को खतरा भी हो सकता है। इससे लिवर, दिमाग और फेफड़ों में संक्रमण होने का खतरा रहता है। इस बीमारी में डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या भी घटने लग जाती है। इसके कारण शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। 

बीमारी के लक्षण 

. सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द और शरीर में कमजोरी। 

. बुखार, सांस फूलना, जी मितलाना, उल्टी होना। 

. कई मामलों में शरीर पर सूखे चकते भी होने लगते हैं। 

. इस बीमारी से जूझ रहे 40-50 फीसदी लोगों में कीड़े के काटने का निशान भी दिखता है। यह निशान गोल और ब्लैक मार्क की तरह होता है। परंतु कई लोगों में यह निशान नहीं दिखता भी नहीं है। 

. किडनी भी कई बार सही से काम नहीं कर पाती जिसके कारण मरीज बेहोशी की हालत में चला जाता है। बीमारी के गंभीर हो जाने पर मरीज में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लग जाती है। 

. यदि बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए तो फेफड़े, किडनी और लिवर पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। 

कैसे लोगों को होता है इस बीमारी का खतरा? 

.  पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आस-पास यह कीड़े बहुत ही ज्यादा पाए जाते हैं। बारिश के मौसम में जंगली पौधे या फिर घनी घास के पास इन कीड़ों के काटने का खतरा बहुत ही ज्यादा रहता है। 

.  ब्लड टेस्ट के जरिए इम्युनोफ्लोरेंसेस टेस्ट से स्क्रब टाइफ्स के एंटीबॉडीस पता लगते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक मरीजों के दवाइयां भी चलती हैं। 

. मरीज को इस बीमारी के दौरान तला-भुना कम और लिक्विड डाइट ज्यादा लेनी चाहिए। 

. जिन लोगों के घर के आसपास ऐसी बीमारी फैली हुई है उन्हें डॉक्टर से हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा जरुर लेनी चाहिए।