जनपद फतेहपुर मे आज की कृषि परिस्थिति के अनरूप ही अपनाना होगा खेती बाडी की तकनीकी - के वी के फतेहपुर

फतेहपुर। जनपद फतेहपुर कृषि के लिये एसा जनपद है जहा पर गंगा यमुना के दोआबा के साथ ऊसर, वीहड़ एवं सिंचित,असिंचित क्षेत्र की खेती होती है कृषि विज्ञान केन्द्र कृषि परिस्थिति के अनरूप खेती बाडी की तकनीकी विकसित किया है जिसे जानकर खेती करने की आवश्कता है ।

 कृषि विज्ञान केन्द्र थरियाँव फतेहपुर के वैज्ञानिक डा० साधना वैश प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व मे जनपद मे खरीफ फसलो के लाभकारी उत्पादन हेतु तकनीकी सुझाव दिये जा रहे है। किसी भी जनपद का विकास जनपद की खेती विकसित होने पर निर्भर होता है। जनपद मे यदि खेती अच्छी होती है तो विविधीकरण के साथ व्यस्त खेती होती है तथा पूरे जनपद का विकास समन्वित होता हैं अच्छी खेती की होड़ ,प्रतिस्पर्धा एवं खेती मे रुझान बढने  से लोग आर्थिक रुप से मजबूत तो होते ही है सामाजिक विकास भी होता है ।

 आज की खेती मे सबसे अधिक ध्यान देने की आवश्कता हैं भूमि के घटते स्वास्थ्य जिसमे सबसे अधिक चिन्ताजनक धान - गेहूँ  फसल चक्र की खेती वाला क्षेत्र हैं । 

धान - गेहूँ  फसल चक्र की खेती मे जीवान्श कार्बन स्तर की गिरावट तथा भूमि की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक  तीनो दशा असंतुलित हो रही है । जनपद फतेहपुर मे मुख्य 6 कृषि परिस्थितिकीय है सभी की वर्तमान स्थित अलग-2 है सभी क्षेत्रो मे अलग-2 संभावनाए है । 

तथा जनपद की 6 प्रकार की खेती की स्थिति के अनरूप  तकनीकी प्रबन्धन, निवेश व संसाधन की आवश्यकता को जानना होगा और उसी के अनरूप प्रदर्शन, प्रशिक्षण,योजनाओ का क्रियान्वयन तथा बीज,उर्वरक व दवाओ की उपलब्धता सुनिश्चित  करना होगा।

 जनपद फतेहपुर मे धान-गेहूँ  की खेती के  साथ गंगा किनारे का क्षेत्र, ऊसर भूमि का क्षेत्र ढालू भूमि आदि क्षेत्र है इन क्षेत्रो मे प्रथम आवश्कता है भूमि व खेत की मिट्टी का संरक्षण तथा भूमि की भौतिक,रासायनिक, जैविक तीनो दशाओ को मजबूत करना ये तीनो दशाओ को संतुलित करने के लिये कई तकनीकी प्रबन्धन है एवं विधाए है परन्तु उसमे तुरन्त कारगर उपाय ढेचा की हरी खाद बहुत ही लाभकारी है। इसके पूर्ब कई गोष्ठियो, प्रशिक्षण के साथ समाचार पत्रो  के माध्यम से ढेचा की हरी खाद खेत मे पलटने की सलाह दी जा रही है।

धान की रोपाई के पूर्ब 45-50 दिन के ढेंचा की हरी खाद पलटने की सलाह दी जा रही हैं। ढेचा हरी खाद पलटकर तुरन्त धान की रोपाई करे तथा यूरिया की मात्रा आधी कर दे। धान की खेती मे रोपाई व रोपाई के बाद की तकनीकी को जाने और लागू करे । धान के खेत के चारो मेड के किनारे ढेचा बोकर बीज तैयार करे। धान के खेत के मेड पर अरहर बोकर दाल से स्वावलंबी बने । 

जनपद फतेहपुर की खेती को आयपरक बनाने हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र से तकनीकी प्राप्त कर खेती करने तथा योजनाये संचालित होने से खेती लाभकारी होगी। प्रभावी किसान उत्पादक संगठन (एफ पी ओ), प्रसार कार्यकर्ताओ को किसानो तक तकनीकी पहुचाने हेतु तकनीकी दक्षता एवं सम्प्रेषण कौशल मे प्रशिक्षित करने हेतु माडूयूल तैयार किया गया है विभाग प्रशिक्षण आयोजित कराकर प्रसार कार्यकर्ताओ को प्रशिक्षित करा सकते है।