जीवन में काम का महत्व

 एक गांव में एक लड़का रहता था। उसका नाम रिंकू था। वह बहुत आलसी था ।उसका मन पढ़ने लिखने मैंनहीं लगता।

  जब देखो वह लेटा ही रहता था । उसकी मां भी इन आदतों से तंग आ गई रिंकू स्कूल भी सप्ताह में एक-दो दिन ही जाता था। एक बार वह आठ दिन के बाद स्कूल गया  उसके दोस्तों ने कहा अरे रिंकू तुम स्कूल आ गए बहुत अच्छा है अगले हफ्ते से हमारी परीक्षाएं है उसने कहा अरे होने दोमुझे तो पढ़ने से बहुत डर लगता है।

   गांव में साधु महात्मा है उनके पास एक जादुई चिड़िया है। वही मुझे पेपर में पास करा देंगी। ऐसा सोचकर वह उन महात्मा के पास गया ।महात्मा से कहा क्या आप मुझे कोई ऐसा उपाय बता सकते हैं ,जिससे मैं बिना मेहनत के पास हो जाऊं? महात्मा ने कहा क्यों नहीं जंगल में मेरे आश्रम में एक जादुई चिड़िया है, जिसकी आवाज मात्र सुनने से तुम्हें पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी ,और तुम तुम्हें सब किताबे अपने आप याद हो जाएंगी।

   रिंकू यह सुनकर खुशी से पागल हो गयाअगले दिन उसने जंगल में जाने की सोचा। वह सुबह सुबह अपने घर से निकल गया, और चलते-चलते रिंकू को दोपहर हो गई ।वह चलता रहा है तभी उसको एक औरत मिली ,उसने कहा अम्मा जी क्या आप मुझे पानी पिला देंगी, उसने अपनी मटकी में से रिंकू के हाथ धुलाए और उसको पानी पिला दिया उसको  पानी बहुत मीठा लगा ।

    थोड़ा और चलते-चलते उसको काफी देर हो गई,अब उसको भूख लगने लगी वह सोचने लगा घर पर तो मैं अब तक कितनी बार खाना खा लेता ,तभी उसको एक आदमी फल और कुछ खाने का सामान ले जाता हुआ दिखाई दिया उसने उससे पैसे देकर खाने का सामान ले लिया और उसको खाने लगा उसको उस दिन फलऔर दिन के खाने से स्वादिष्ट लगे वह फिर आगे चल दिया उसने फिर किसी वृद्ध आदमी से पूछा जहां जादुई कोयल रहती है वह आश्रम कितनी दूर है। उन्होंने कहाँ यही पास में ही है वह जिस से भी पूछता आश्रम कितनी दूर है ,सब कहते थोड़ी दूर है।

     अब रात होने लगी थीऔर उसे डर भी लगने लगा ।रिकू को समझ नहीं आ रहा था क्या करें मैं थोड़ी दूर और चला उसको महात्मा जी आश्रम के बाहर टहलते हुए दिखाई दिए। उन्होंने पूछा तुम्हें यहां तक आने में कोई कष्ट तो नहीं है रिंकू बोला घर पर मुझे सब कुछ बिना मेहनत के ऐसे ही मिल जाता है ।जो आज मैंने गर्मी में पानी पिया उसका स्वाद बहुत अलग था और जो मैंने फल खाए वह भी बहुत स्वादिष्ट है जो मैंने परिश्रम करके अंधकार को दूर करने के लिए लकड़ियों को रगड़ रगड़ कर अग्नि उत्पन्न करें वह उसकी तो बात ही क्या थी अब मुझे समझ आ गया है की मेहनत करके खाना खाने में कितने मिठास है।

     और अब मैं अपने मेहनत से परीक्षा में अच्छे नंबर से पास होऊंगा अब मुझे उस जादुई कोयल की आवाज की जरूरत नहीं है। महात्मा जी बहुत खुश हुए उन्होंने कहाँ यह सब तुम्हें काम के महत्व को समझाने के लिए कहा था।

      अंदर जादुई कोयल है जो तुम्हारी सब इच्छाओं को पूरा कर देगी तुम उसकी आवाज सुन सकते हो उसने कहा नहीं नही महात्मा  जी अब मुझे सबक मिल गया है की मेहनत से उत्तम कोई चीज नहीं है।।

      अब मैं हर काम मेहनत और लगन से करूंगा मुझे जिंदगी में काम की महत्ता समझ आ गई है।


                     रचनाकार ✍️

                    मधु अरोरा