योगासन में वज्रासन का महत्व

नियमित रूप से योग करने से शरीर, मन और आत्मा संतुष्ट रहती है। आजकल ऑफिस, घर और रिश्तों की वजह से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं, उनमें तनाव रहता है जिससे वे धीरे-धीरे मानसिक बीमारियों से घिर जाते हैं। लेकिन ऐसे में योग का महत्व समझा जा सकता है, योग करने से आप सभी चीजों में संतुलन बनाने में कारगर हो सकते हैं। मन को शांत रखने के लिए योग से बढ़कर कुछ नहीं है।

योग से वजन में कमी, एक मजबूत एवं लचीला शरीर, सुन्दर चमकती त्वचा, शांतिपूर्ण मन, अच्छा स्वास्थ्य-जो आप चाहते हैं, योग आपको देता है। योग को केवल कुछ आसनों द्वारा आंशिक रूप से समझा जाता हैं, परंतु इसके लाभ का आंकलन केवल शरीर स्तर पर समझा जाता है। हम ये जानने में असफल रहते हैं कि योग हमें शारीरिक, मानसिक रूप से तथा श्वसन में लाभ देता है। जब आप सुन्दर विचारों के संग होते हैं तो जीवन यात्रा शांति, ख़ुशी और अधिक ऊर्जा से भरी होती है। योग से संपूर्ण स्वास्थ्य, वजन में कमी, चिंता से राहत, अंतस की शांति, प्रतिरोधक क्षमता में सुधार, अधिक सजगता संग जीना, संबंधों में सुधार और ऊर्जा में वृद्धि होती है।

योगासनों में वज्रासन बहुत महत्वपूर्ण है। इस आसन की यह विशेषता है कि यह भोजन करने के तुरंत बाद भी किया जा सकता है और भूखे पेट भी किया जा सकता है। इसकी विधि इस प्रकार है-

वज्रासन की विधि-

1. भोजन करने के 5 मिनिट बाद एक समान, सपाट और स्वच्छ जगह पर कम्बल या आसन बिछाएं। दोनों पैर सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं। 2. अब बाएं पैर के घुटने को मोड़कर इस तरह बैठे के पैरों के पंजे पीछे और ऊपर की और हो जाए। 3. अब दाएं  पैर का घुटना भी मोड़कर इस तरह बैठें कि पैरों के पंजे पीछे और ऊपर की ओर हो जाएं और नितम्ब दोनों एड़ियों के बीच आ जाए। 4. दोनों पैर के अंगूठे एक दूसरे से मिलाकर रखें। दोनों एड़ियों में अंतर बनाकर रखें और शरीर को सीधा रखें। 5. अपने दोनों हाथों को घुटने पर रखें और धीरे-धीरे शरीर को ढीला छोड़ें। 6. आँखें बंद रखें और धीरे-धीरे लम्बी गहरी साँसें लें और छोड़ें। 7. इस आसन को जब तक आरामदायक महसूस करें तब तक कर सकते हैं। शुरुआत में केवल 2 से 5 मिनिट तक ही करें। 8. अभ्यास हो जाने के बाद आप 30 मिनट तक इस आसन में बैठ सकते हैं। वज्रासन की समय सीमा वज्रासन सुबह खाली पेट भी किया जा सकता है और भोजन के बाद भी किया जा सकता है। शुरुआत में वज्रासन तीन से पाँच मिनट तक करना चाहिए। अभ्यास हो जाने पर इसे अधिक समय तक (तीस मिनट तक) भी किया जा सकता है। पैर दुखने लगें या कमर दर्द होने लगे उतनी देर तक वज्रासन में नहीं बैठना है।

वज्रासन के लाभ-

1. शरीर को सुडौल बनाए रखता है और वजन कम करने में मददगार है। 2. महिलाओ में मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है। 3. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता हैं। 4. अपचन, गैस, कब्ज इत्यादि विकारों को दूर करता है और पाचन शक्ति बढ़ाता है। 5. यह प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता है। 6. सायटिका से पीड़ित व्यक्तिओ में लाभकर है। 7. इस आसन को नियमित करने से घुटनों में दर्द, गठिया होने से बचा जा सकता है। 8. पैरों की मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं में यह आसन मददगार है। 9. इस आसान में धीरे-धीरे लम्बी गहरी साँसें लेने से फेफड़े मजबूत होते हैं। 10. वज्रासन से नितम्ब, कमर और जांघ पर जमी हुई अनचाही चर्बी कम हो जाती है। 11.  उच्च रक्तचाप कम होता है।

 वज्रासन में सावधानियां- 

1. वज्रासन करने पर चक्कर आने लगे, पीठ दर्द होने लगे, टखनें दुखने लगें, घुटनें या शरीर के कोई भी अन्य जोड़ अधिक दर्द करने लगे तो फौरन इस आसन का अभ्यास रोक दें। 2. एड़ी के रोग से पीड़ित व्यक्ति वज्रासन न करंे। 3. गर्भवती महिलाओं को वज्रासन बिलकुल “नहीं” करना चाहिए। 4. वज्रासन  हड़बड़ी में नहीं करना चाहिए। 5. टखनें, घुटनें या एड़ियों पर किसी भी तरह का ऑपरेशन कराया हो, उन्हें यह आसन बिलकुल नहीं करना चाहिए। 6. हड्डियों में कम्पन की बीमारी वाले व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।

-डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर

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