अग्निपीड़ितों ने प्रशासन की उपेक्षा से लगाया जाम

-जिला पंचायत अध्यक्ष व एसडीएम के आश्वासन पर खोला 

बांदा/बबेरू। जंगल से निकली चिंगारी से करीब दो दर्जन से अधिक मकान जलकर राख हो गए। झुलसे दंपती की इलाज के दौरान मौत होने से अधिकारियों की उपेक्षा के चलते ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम में घंटोंएंबुलेंस फंसी रही।काफी मान मनौव्वल व आश्वासन के बाद चक्का जाम खुल सका।

 तहसील क्षेत्र के ग्राम जुगरेहली में गुरुवार को जंगल मे सूखे पत्तों से लगी आग की लपटों ने गांव को अपने आगोश में ले लिया। करीब 30 परिवारों के आशियानों को जलाकर राख कर दिया।इसमें खाने-पीने का सामान व पहनने, ओढ़ने के कपड़े जलकर राख हो गए। इतनी बड़ी घटना के बावजूद भी जिले के साथ तहसील के कोई भी आला अधिकारी नहीं पहुंचा। जिसके चलते पीड़ित परिवार रात भर खुले आसमान के नीचे छोटे-छोटे मासूम बच्चे भूखे पेट सो गए। सुबह भी जब अधिकारी पीड़ितों की सुधि लेने मौके पर नहीं पहुंचे तो नाराज ग्रामीणों ने जुगरेहली बस स्टॉप के पास पहुंचकर बबेरू-बांदा मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। 

जाम लगने से दोनों ओर से सैकड़ों गाड़ियांे के चक्के वही पर रुक गये। इतना ही नहीं कई एंबुलेंस भी मरीजों को लेकर मुख्यालय जा रही थी वह भी जाम में फंस गई। जाम की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली वैसे ही एसडीएम सुरभि शर्मा, नायब तहसीलदार अभिनव तिवारी, तहसीलदार अजय कटियार के अलावा कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार पाठक मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों व पीड़ित परिजनों को समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीणों में उक्त अधिकारियों के प्रति इतना रोष था की उनकी एक नहीं सुनी। 

घटना की सूचना पर जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल भी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों और नेताओं के समझाने के बाद ग्रामीणों ने करीब एक घंटे बाद जाम खोलने के लिए तब राजी हुए जब एसडीएम ने आश्वासन दिया कि कैंप लगाकर पीड़ित परिजनों को भोजन की व्यवस्था की जाएगी। जिन परिवारों को अग्नि से नुकसान हुआ उन परिवारों को दैवीय आपदा के तहत आर्थिक मदद दी जाएगी तब कहीं जाकर करीब एक घंटे बाद जाम खुल सका।