"धर्मांधता की आँधी फैला कर खुद को धर्म निरपेक्ष बताना कितना सही"

या तो भारत को संपूर्ण हिन्दु राष्ट्र बना दो, या जो जैसे चल रहा है चलने दो। ऐसा ही हाल रहा तो एक दिन आंतर विग्रह के कारण देश तबाह हो जाएगा।

हमारा देश अधोगति की गर्ता में जा रहा है, लगता है धर्मांधता ले डूबेगी देश को। आरोप, प्रत्यारोपण और एक दूसरे के भगवान को लेकर आए दिन तमाशा होता रहता है। सियासतियों ने धर्म की आड़ लेकर देश में अराजकता फैलाने का काम किया है, उसको हवा दे रही है अवाम, बिना सोचे समझे मिडिया की पोस्ट पर सरेआम मुस्लिम शिवलिंग की धज्जियां उड़ा रहे है, और हिन्दु अल्लाह की। अरे कुछ तो समझो इनकी चाल को, वाणी पर काबू रखो और ईश्वर को बख़्श दो।

हाल ही में एक टीवी डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक बयान दिया। इस बयान पर काफी हंगामा हुआ और नूपुर शर्मा के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने, द्वेषभाव फैलाने और दूसरे धर्म के खिलाफ़ टिप्पणी करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज हुई। 

क्यूँ सिर्फ़ नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ ही कारवाई? सबसे पहले तो जिसने शांत पानी में कंकड़ फेंका है इस विवाद को जन्म दिया है उसे गिरफ़्तार करो, उन सारे लोगों के ख़िलाफ़ कारवाई होनी चाहिए जिन्होने शिवलिंग को मजाक बना रखा है।

सिर्फ़ नूपुर ही नहीं हर हिन्दुस्तानी का खून खौलता है जब सोशल मीडिया पर भगवान का तमाशा बनाने वाले लिहाज़ नहीं रखते। ज़ाहिर सी बात है उन लोगों को नूपुर ने मुँह तोड़ जवाब देने की हिम्मत की है, तो क्या गलत किया? या तो सहो, या चुप रहो पूरे मामले को कुरेदकर सच दुनिया के सामने लाओ या ये सब आडंबर बंद करो। जनता को भटका दिया है धार्मिक भावना को उश्केरते। नूपुर की कोई गलती नहीं उसे बाइज्ज़त अपना स्थान वापस दिया जाए। अगर कुर्सी के ठेकेदारों को लगता है कि गलती की तो माफ़ी भी मांग ली है नूपुर ने फिर भी क्यूँ उसे सस्पेंड कर दिया गया? क्यूँ शिवलिंग के बारे में अनाप-सनाप बोलने वाले आज़ाद घूम रहे है।

नूपुर ने कहा मैं पिछले कई दिनों से टीवी डिबेट पर जा रही थी, जहां रोजाना मेरे आराध्य शिव जी का अपमान किया जा रहा था। मेरे सामने यह कहा था जा रहा था कि वो शिवलिंग नहीं फव्वारा है, दिल्ली के हर फुटपाथ पर बहुत शिवलिंग पाए जाते हैं, जाओ जा के पूजा कर लो। मेरे सामने बार-बार इस प्रकार से हमारे महादेव शिव जी के अपमान को मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और मैंने रोष में आके कुछ चीजें कह दीं। अगर मेरे शब्दों से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची हो तो मैं अपने शब्द वापिस लेती हूँ। मेरी मंशा किसी को कष्ट पहुंचाने की नहीं थी। फिर भी नूपुर शर्मा को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही बीजेपी मीडिया प्रभारी नवीन जिंदल को पार्टी से निकाल दिया गया है।

बीजेपी की ओर से रविवार को एक बयान जारी कर कहा गया कि पार्टी सभी धर्मों का सम्मान करती है। बीजेपी ने कहा कि पार्टी किसी भी धर्म से जुड़े व्यक्तित्व की आलोचना की कड़ी निंदा करती है। इसके कुछ घंटे बाद ही नूपुर शर्मा को निलंबित करने की खबर आती है। ऐसे बयान विपक्षियों की ओर से तो बार-बार आते रहते है जैसे ओवैसी साहब, क्यूँ आज तक उनके ख़िलाफ़ कोई कारवाई नहीं हुई? सरकार, पुलिस सुप्रिम कोर्ट सभी ने आँख-कान बंद कर लिए है। हिन्दु अपने धर्म के लिए आवाज़  उठाए तो क्यूँ दबा दिया जाता है? 

नीति नियमों का पालन करना ही है तो सभी के लिए नियम एक से होने चाहिए। अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश और धर्म के लिए एक शब्द भी हल्का बोलने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कारवाई करनी चाहिए।  न की किसी एक को टारगेट बनाकर अपनी पार्टी को धर्म निरपेक्ष जताया जाए। 

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर