लक्ष्मीबाई

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

 मनु मणि कर्णित महान थी 

वाराणसी उत्तर प्रदेश जन्म

 उन्नीस नवंबर अट्ठारह पैतीस 

 मोरोपंत ताबे भागीरथी बाई 

 पालन पोषण भूमिका निभाई 

पर माँ बहुत जल्दी चल बसी 

मनु पिता के साथ ही रही 

पति गंगाधर राव पुत्र दामोदर राव

 प्रथम वनिता स्वतंत्रता संग्राम 

मृत्यु ग्वालियर मध्य प्रदेश

अट्ठारह जून अट्ठारह अट्ठावन  

मनु ने सीखी मल्लविद्या और 

घुड़सवारी और शस्त्र विद्यायें 

मनु छबीली भी कही जाती थी 

वह बुद्धिमान कुशल बहुत थी 

पति पुत्र की मृत्यु हो गई

 इन्होंने दत्तक पुत्र की सोची

कंपनी ने शासन छीन लिया 

पर रानी ने कल्याण किया

 उन्होंने महिलाओं को आजादी दी 

व्यायामशाला अनेक प्रबंध किए

 रानी बड़ी उदार दयालु भी थी

 उन्होंने गरीबों की खूब मदद की 

पुत्र को लेकर साथ वह लड़ी 

किसी से भी वह नहीं डरी 

वीर थी अंग्रेज के टुकड़े किए 

उन्हे  अपनी आंख गवानी पड़ी 

फिर भी वह आगे बढ़ती गई 

पर धोखे की गोली सीने में लगी 

अंगरक्षक गुल मोहम्मद पठान 

ले गये आश्रम गंगादास

वह वीरगति को प्राप्त हुई

 देश में जय जयकार हुई

 खूब लड़ी वह वीरांगना थी 

वह भारत की अनुपम  नारी थी

 पूनम पाठक "बदायूँ "

 इस्लामनगर 

 बदायूं उत्तर प्रदेश