जन-भागीदारी से सुद्रण समाज की परिकल्पना संभव, सामुदायिक जिम्मेदारी से बढ़ता है लोगो का आत्मीय जुडाव

मध्यप्रदेश के मुखिया की एक पहल ने पूरे प्रदेश में एक हलचल मचा दी है, मुख्यमंत्री आँगनवाडी के बच्चों के लिए लोगो से खिलौना जुटाने के लिए स्वयं चल दिए हाथ ठेला लेकर l लोगो का हुजूम पीछे पड़ गया अरे क्या हो रहा है यह l प्रदेश के मुखिया के हाथ में हाथ ठेला ! लोगो ने इस पहल की काफी तारीफ भी की, कुछ लोगो ने इस कार्य की आलोचना भी की l आलोचको का कहना था अरे देखो ! प्रदेश के मुखिया अब हाथ ठेला चलने लगे है l परन्तु मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की दूरदर्शिता भरी सोच देखिये; इन्होने अपने लाज मोह को न देखते हुए छोटे बच्चों के विकास में जन समुदाय की भूमिका को समझाने के लिए स्वयं समुदाय के बीच आ गए एवं लोगो को सामुदायिक जुडाव के फायदे बता डाले l उनकी कुल 800 मीटर की यात्रा में जन सहयोग से दस ट्रक सामग्री और 2 करोड़ रूपये के चेक प्रदान किये गए l बहुत से लोगो ने आँगनवाडियों की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया l यह जनभागीदारी का अद्भुत प्रयोग रहा l सामाजिक कार्यों और लोगो का जीवन स्तर उठाने में सहयोग सहयोग के लिए बहुत से लोग तत्पर दिखे l हमें इसी प्रकार के आयोजन से जन-कल्याणकारी योजनायों पर विकास गतिविधियों में जन-भागीदारी को अभियान का रूप देना होगा l   

हम सभी को पता है कि सामुदायिक मदद से बड़े से बड़े कार्यों को चुटकियों में पूर्ण किया जा सकता है l यही कारण है कि हमेशा से हमें “एकता में शक्ति” का पाठ पढ़ाया जाता है l सामुदायिक मदद एक ऐसा कार्य होता है जिसमे सभी का योगदान रहता हैl आज हर सरकारी संस्थाओं का हाल देखिये l सभी को लगता है कि ये सरकारी है l इसको दुरुस्त करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की है; पर हम ये भूल जाते है कि ये सरकारी चीजे आखिर हमारे लिए ही है हम जितना इसका उपयोग हमारा अपना समझकर करेंगे वह हमारे लिए उतना ही फायदेमंद होगी l ग्रामीण क्षेत्रो में तो कुछ गिनती की वस्तुएँ ही होती है जो ग्राम की शक्ति एवं उन्नति के अग्रदूत होती है l गाँव के आंगनबाड़ी केन्द्र, ग्राम के स्कूल, ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आदि सरकारी होते है l सबको लगता है कि इसकी व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी सरकार की है l भाई एक बात बताओं! इन सब सुविधाओं का उपयोग हम ही करते है न ! यदि हम इस व्यवस्था को दुरुस्त करने में हमारी सामुदायिक भूमिका निभायंगे तो यह संसाधन हमारे लिए और अधिक समय के लिए कारगर रूप से काम करेगा और हमें सुविधा पहुंचाएंगा फिर इस जिम्मेदारी दे दूर क्यों भागते है सब लोग?

आज शिक्षा का महत्त्व बढ़ गया है l लोग अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे से अच्छे शिक्षा संस्थान में पढ़ाई करने के लिए लाखो खर्च करने से पीछे नहीं हटते l हमारे आसपास ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे की फला बच्चा का दाखिला एक बड़े स्कूल में हुआ है l इस स्कूल में दाखिला के लिए उन्होंने उस स्कूल को एक बड़ी रकम दान स्वरुप दीया l और ये रकम कम नहीं होती कई बार एक बड़े स्कूल में दाखिला के लिए लोग लाखो का दान दे डालते है l ये स्कूल तो पहले से ही दुरुस्त है यदि दुरुस्त और ठीक-ठाक करना है तो ऐसे स्कूल को करें जहाँ वास्तव में जरुरत है l ऐसे ही हमारे प्रदेश के कई सरकारी स्कूल सामुदायिक मदद के लिए मुह तकते मिल जायेंगे l उन स्कूल की उखड़ी हुई दीबारे, छत से रिस्ता पानी, और उखड़ी फर्श ऐसे आशा में ही डीएम तोड़ देती है कि कभी तो कोई उनकी सुध लेने कोई आयेगा l मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की सामुदायिक मदद की पहल ऐसे ही सुध लेने की आशाओं को सार्थक करने के लिए एक बड़ी चिंगारी के रूप में प्रकट हुई है l मदद की यह चिंगारी पूरे प्रदेश को चकाचौंध कर सकती है यदि इस पहल को सकारात्मकता से पूरा किया गए l आंगनवाडी के बच्चों के लिए खिलौने प्रदान करने के लिए यह पहल लोगो को आंगनवाडी एवं उसमे आने वाले बच्चों को भावनात्मक एवं आत्मीय रूप से जोड़ने का कार्य करेगी l कई घरों में ऐसे खिलौने का अम्बार लगा होगा जो उनके घर के बच्चों को पसंद ही नहीं है l परन्तु यही खिलौने किसी और बच्चे जिसने खिलौने का दर्शन ही नहीं किया हो के लिए को वरदान रुपी ख़ुशी से कम नहीं होगा l

लोगो के मन में सामुदायिक मदद से अपने क्षेत्र में चलने वाले कार्य को और कैसे वेहतर किया जा सकता है इसकी सीख लोगो तक पहुचने एवं सामुदायिक मदद के होने वाले फायदे सब जानते है परन्तु कोई अपने तरफ से पहल नहीं किया जता है l आपकी एक छोटी सी मदद किसी का ख़ुशी का कारन बन सकती है l बहुत से नन्हे चहरे है जो कभी मुस्कुराएँ नही है l हमारी मदद न जाने कितने चेहरे को ख़ुशी दे, न जाने कितनी नन्ही किलकारियाँ फिर से फ़िजा में गूंजने लगे l

लेखक

श्याम कुमार कोलारे

सामाजिक कार्यकर्त्ता, छिन्दवाड़ा (मध्यप्रदेश)

मोबाइल – 9893573770

shyamkolare@gmail.com