उन्माद


डूब रहा है अपना अरमान,

साहिल बनने की पहल कौन करे?

मरते रहे एक होने के लिए,

एक होने की पहल कौन करे?

दुश्मन बने हैं एक- दूसरे के लिए,

अपनापन की पहल कौन करे?

घनघोर अंधेरी रात में,

उजाले की पहल कौन करे?

धूल भरी है दिलों में नफ़रतों की,

बनकर घटा प्यार की बारिश कौन करे?

चुमना है अब हमें आसमान को,

अंदर की खामियाँ दूर कौन करे?

फूल लगाए ही नहीं उपवन में,

फिर शूलों से शिकायत कौन करे?

खीचे पड़े हैं बेएतिबारी की लकीरें ,

बनकर एतबार लकीर मिटाने की 

अब पहल कौन करे?

भटक रहे हैं जीवन पथ से ,

सही राह लाने की पहल कौन करे?

छलकतें हैं अम्बक से मोती प्रेयसी,

बनकर प्यार की सिसकियाँ कौन भरे?

मन में उठ रहे जेठ के बवंडर को मिटाने की,

बनकर सावन का रिमझिम बौछार कौन करे?

उन्माद है मिट जाये नफ़रतों की दूरियाँ,

प्यार की सेतु बनने की पहल कौन करे?

           

सिकन्दर कुमार

छपरा  , बिहार