कोयला कटौती से पहले बढ़ा बिजली संकट, गांव-तहसील में चार घंटे की कटौती

लखनऊ। कोल इंडिया ने कोयले की कटौती अभी शुरू भी नहीं की है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती बढ़ गई है। ग्रामीण और तहसील क्षेत्र के करीब दो करोड़ उपभोक्ताओं को दो से चार घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। शहरी क्षेत्र में मरम्मत के नाम पर तीन से पांच घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है।

लखनऊ में पिछले दो दिन से छोटे-बड़े करीब 100 से ज्यादा फॉल्ट हुए। स्थिति यह है कि बिजली कटौती को लेकर एक दिन में पांच हजार से ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। एक तरफ बिजली संकट बढ़ गया है, दूसरी तरफ कोल इंडिया और पावर कॉर्पोरेशन के बीच विदेशी कोयला खरीदने का मामला खत्म नहीं हुआ है। केंद्र के आदेश के बाद भी यूपी सरकार ने अभी तक विदेशी कोयला खरीदने के लिए टेंडर नहीं निकाला है। कोल इंडिया ने इसके लिए 6 जून तक का समय दिया था। ऐसे में अब कभी भी 30 फीसदी कोयले की सप्लाई कम की जा सकती है। 

यूपी को पहले ही डिमांड के अनुसार, करीब 20 से 25 फीसदी कोयला कम मिल रहा है। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 15 से 17 रैक कोयले की जरूरत है, लेकिन अभी अधिकतम 13 रैक कोयला मिल रहा है। बिजली की डिमांड अभी 25 हजार मेगावॉट है। अगर यह बढ़कर 26 हजार तक पहुंचती है, तो कटौती बढ़ना तय है। इस कमी के बीच अगर नियमित या किसी भी दिन 30 फीसदी कोयले की सप्लाई कम कर दी गई, तो बिजली संकट से उबर पाना मुश्किल होगा। जानकारों का कहना है कि गांव से लेकर तहसील और इस बार शहरों में 8 से 10 घंटे के लिए बिजली कट सकती है। 

कोल इंडिया ने साफ कहा है कि 7 जून के बाद 30% और 15 जून के बाद 40% कोयले की सप्लाई कभी भी रोकी जा सकती है। ऐसे में 40% कोयला कम मिला, तो यूपी में आवासीय सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इंडस्ट्री की सप्लाई भारी नुकसान की वजह से कम नहीं कर सकते है, ऐसे में घरेलू सप्लाई की कटौती होगी। यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि सरकार का यह फैसला असंवैधानिक है। उन्होंने बताया कि कोल इंडिया और उत्पादन इकाइयों के साथ एग्रीमेंट में सीधा प्रावधान है कि कोई भी उत्पादन इकाई चाहे तो विदेशी कोयला ले और चाहे तो न ले। 

इसके लिए कार्रवाई नहीं की जा सकती। अब 10% विदेशी कोयला खरीदने का दबाव बनाना गलत है। अवधेश वर्मा ने बताया कि देश में कोयला उत्पादन 30% बढ़ा है। खुद कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी ने अपने एक ट्वीट के जरिए बताया है। उन्होंने बताया कि मई 2021 में जहां देश में कोयले का उत्पादन केवल 42 मिलियन टन यानी 420 क्विंटल था। वह मई 2022 में 30 प्रतिशत बढ़कर 54 मिलियन टन यानी 540 क्विंटल पहुंच गया है। 

ऐसे में देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। 11 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ने से यूपी में बिजली दर 85 पैसे से लेकर एक रुपए प्रति यूनिट तक बढ़ जाएगी। ऐसे में दो किलोवॉट के एक आम उपभोक्ता का बिल हर महीने करीब 150 रुपए तक बढ़ सकता है। माना जाता है कि दो किलोवॉट का उपभोक्ता है, तो उसके यहां महीने में 150 यूनिट बिजली इस्तेमाल होती है। महंगी बिजली का सीधा लाभ निजी घरानों को मिलेगा।