वाराणसी सीरियल बलास्ट में दोषी वलीउल्लाह को फांसी की सजा, 18 लोगों की दी थी रूह कंपा देने वाली मौत

वाराणसी : वाराणसी सीरियल बलास्ट में गाजियाबाद की जिला अदालत ने दोषी वलिउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई है। बता दें कि 16 साल पहले संकटमोचन और कैंट स्टेशन में यह सीरियल ब्लास्ट हुआ था। दरअसल, सात मार्च, 2006 को संकट मोचन मंदिर और छावनी रेलवे स्टेशन पर हुए विस्फोटों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे। 

वाराणसी सीरियल ब्लास्ट मामले में 5 जून को सेशन कोर्ट में हुई। सुनवाई के बाद दोषी वली उल्लाह को 2 मामलों में दोषी ठहराया था, जिसका फैसला न्यायालय ने आज सुनाया। कोर्ट ने उनमें से एक मामले में आजीवन कारावास तो वहीं दूसरे मामले में दोषी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई गई।

16 साल पहले 7 मार्च 2006 को वाराणसी में संकटमोचन मंदिर और कैंट स्टेशन पर धमाके हुए थे। सीरियल ब्लास्ट में 18 लोगो की मौत हो गई थी। एक अन्य आरोपी को मार गिराया गया था। वहीं शनिवार को वलीउल्लाह को दोषी करार दिया गया था। कोर्ट ने सोमवार वाराणसी सीरियल ब्लास्ट के दोषी वलीउल्लाह उर्फ टुंडा को फांसी की सजा सुनाई है। वाराणसी सीरियल ब्लास्ट केस का फैसला जिला जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने सुनाया है।

 आईपीसी 302, 324, 307, 326 आईपीसी 3/4 /5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 15-16 दूसरे मुकदमे में 3/4/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम इन धाराओं पर केस चलाए गए हैं। दशमेध मंदिर जहां विस्फोटक पदार्थ एक काले बेग में बरामद किया गया था। वहीं अलग अलग मसमलो 30 हजार ओर 20 हजार तक जुर्माना ओर आईपीसी 302 मे फांसी की सजा सुनाई गई। इसमें अन्य आरोपी पत्रावली को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भेजा जा रहा है।

 संकट मोचन मामले में कुल 47 गवाह और 3 बचाव साक्ष्य पेश किये गए थे। दशमेध घाट वाले केस में 20 गवाह और 3 बचाव साक्ष्य पेश किए गए। 7 मार्च 2006 को वाराणसी के संकट मोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इस घटना में 18 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उसी शाम को दशाश्वमेध घाट पर भी विस्फोटक मिले थे। 

पुलिस ने 5 अप्रैल 2006 को इस मामले में इलाहाबाद के फूलपुर गांव निवासी वली उल्लाह को लखनऊ के गोसाईंगंज इलाके से गिरफ्तार किया था। वली उल्लाह पर संकट मोचन मंदिर और वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर विस्फोट की साजिश रचने व आतंकवाद फैलाने का आरोप है। वली उल्लाह का मुकदमा लड़ने से वाराणसी के वकीलों ने मना कर दिया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने यह केस गाजियाबाद जिला जज के न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया था। तभी से केस की सुनवाई गाजियाबाद स्थित जिला जज की कोर्ट में चल रही है।