सांध्य प्रार्थना में तुम

मृगांक ज्योत्स्ना में तुम,

सांध्य प्रार्थना में तुम,

उषा की लालिमा में तुम,

निशा की कालिमा में तुम।

मदन शर झरित सुमन में तुम,

मुदित मन में तुम,

उर वीणा की तान में तुम,

नुपुर की झंकार में तुम।


मेरी हर सुबह में तुम,

मेरी हर शाम में तुम,

चंचल दृग के आधार तुम,

जीवन के सार तुम।

कोकिल की कंठ में तुम,

ज्ञानी औ संत में तुम,

मिथक जग सच्चे तुम,

मेरे कान्हा सबसे अच्छे तुम।


                      रीमा सिन्हा (लखनऊ)