डायबिटीज को कंट्रोल में रखेगा ये आयुर्वेदिक नुस्खा, रोग से मिल जाएगा छुटकारा

शुगर यानि डायबिटीज की बीमारी जो एक बार लग गई तो पूरी उम्र पीछा नहीं छोड़ती। पहले तो उम्र के एक पड़ाव में आकर इस बीमारी की आशंका रहती थी लेकिन आज छोटे-बड़े और बूढ़े, हर उम्र का व्यक्ति इस रोग की चपेट में आ रहा है। एक ऐसा रोग जो इंसान के शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर देती हैं इसीलिए तो इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो साल 2030 तक 10 में से 1 शख्स डायबिटीज का शिकार होगा। 

वहीं चौरिटी डायबिटीज यूके का दावा है कि बढ़ते मोटापे की वजह से एक दशक में करीब 55 लाख व्यस्क इस बीमारी की चपेट में आ जाएंगे जो कि अब 49 लाख के करीब हैं। ये बीमारी आपसे दूर रहें इसलिए आपका हैल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना बहुत जरूरी है। वजन को कंट्रोल में रखें, खाना हैल्दी खाएं और फिजिकल एक्टिविटी करते रहे लेकिन जो लोग इस बीमारी की चपेट में हैं वो पहले इस बीमारी के बारे में समझें और फिर उपचार करें।

आखिर ये बीमारी है क्या?

तो आपको बता दें कि ये एक मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है जिसमें मरीज के रक्त में ग्लूकोज का लेवल बहुत बढ़ जाता है और जरूरत के हिसाब से इंसुलिन नहीं बन पाता। मोटे शब्दों में कहे तो जब शरीर सही तरीके से खून में मौजूद ग्लूकोज या शुगर का उपयोग नहीं कर पाता तो उसे डायबिटीज हो जाती है

जिसकी बहुत सी वजह हो सकती हैं जैसेः मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल, हार्मोंन्स की गड़बड़ी, खान-पान की आदतें सही ना होना, फिजिकल एक्टिविटी ना करना और परिवार के किसी अन्य व्यक्ति को शुगर की बीमारी होना। 

डायबिटीज भी दो तरह की होती हैं टाइप-1 और टाइप-2 

टाइप-1 में तो रोगी के शरीर में इंसुलिन बहुत कम मात्रा में बनता है इसलिए उसे बाहर से इंसुलिन देकर कंट्रोल में किया जाता है। इस टाइप में डायबिटीज का कोई स्थाई उपचार नहीं है। व्यक्ति को पूरी जिंदगी में टाइप-1 का मरीज बनकर रहना पड़ता है। ऐसे लोगों को इंसुलिन लेना ही पड़ता है। यह ज्यादातर 18 से 20 साल के युवाओं को प्रभावित करती है।

जबकि टाइप-2 में रोगी, इंसुलिन का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता है। शरीर इंसुलिन बनाता तो है लेकिन कम मात्रा में हालांकि अच्छी डाइट और सही उपचार की मदद से आप इस रोग से पीछा छुड़वा सकते हैं। 

रिपोर्ट की मानें तो टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 90 फीसद मामले अनहैल्दी लाइफस्टाइल की वजह से होते हैं। इसलिए लाइफस्टाइल को सही करना ही सबसे ज्यादा जरूरी है। 

डायबिटीज के पैशेंट को कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है जैसेः

. मीठा कम खाएं। शक्कर से भरी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाने से बचें। 

. पानी ज्यादा पीएं और भोजन समय पर करें लेकिन एक साथ ज्यादा नहीं बल्कि छोटे-छोटे मील में खाएं। 

. हाई फाइबर डाइट खाएं और प्रोटीन का सेवन भी अधिक मात्रा में करें।

. विटामिन डी की कमी शरीर में ना होने दें। स्मोकिंग और अल्कोहल से परहेज करें।

. सब्जियों में करेला, ककड़ी, खीरा, टमाटर, शलजम, लौकी, तुरई, पालक, मेथी, गोभी खाएं लेकिन आलू और शकरकंदी ना लें। 

. फलों में सेब, अनार, संतरा, पपीता, जामुन, अमरुद का सेवन करें लेकिन हाई शुगर वाले फल जैसे आम,केला, लीची, अंगूर कम खाएं। 

. सूखे मेवों में बादाम, अखरोट, अंजीर खाएं। किशमिश, छुआरा, खजूर इनका सेवन न करें।

. एक्टिव रहें और एक्सरसाइज करें। डायबिटीज पेशेंट को एक घंटा सैरऔर प्राणायम करना चाहिए ताकि वह स्ट्रेस फ्री रह सकें। 

डायबिटीज मरीज कुछ देसी और आयुर्वेदिक नुस्खे फॉलो कर इसे कंट्रोल में रख सकते हैं जैसे 

जामुन की गुठली

आयुर्वेदिक में डायबिटीज के इलाज के लिए जामुन की गुठलियों को बेस्ट माना गया है। इसकी गुठलियों को सुखाकर पीस लें और चूर्ण बना लें फिर सुबह खाली पेट इसे गुनगुने ताजे पानी के साथ लें। 

करेला और नीम का जूस भी बहुत बढ़िया माना जाता है। खाली पेट करेले के जूस में टमाटर खीरा मिलाकर पीएं। आप नीम के पत्तों का जूस भी पी सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस जूस को रोजाना सुबह खाली पेट पीना चाहिए।

डायबिटीज मरीजों को दालचीनी वाली चाय दिन में 2 बार पीनी चाहिए। इसी के साथ वह दूध वाली चाय की जगह पर ग्रीन टी का सेवन करें तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि यह इम्यूनिटी को भी बढ़ाती है और पाचन तंत्र को भी बूस्ट करती है। ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए कैमोमाइल टी भी फायदेमंद है। आप दिन में 2 बार इसका सेवन कर सकते है।

आंवले के जूस भी फायदेमंद हैं आप 10 मि.ग्रा. आंवले के जूस में 2 ग्राम हल्दी मिलाकर दिन में दो बार ले सकते हैं। 

मेथी भी इन रोगियों के लिए बहुत बढ़िया मानी जाती है। आप एक चम्मच मेथी के बीज रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इनका सेवन करें और दानों को चबाकर खाएं। 

इसके अलावा ये मरीज तुलसी की 2 से 2 पत्तियां चबाएं। अमरूद की पत्तियों का पानी भी इनके लिए बहुत बढ़िया माना जाता है। खाने में जैतून तेल का इस्तेमाल करें इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है और हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा भी कम होता है।

आयुर्वेद में लहसुन का काफी इस्तेमाल किया जाता है। लहसुन से कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह को कंट्रोल किया जा सकता है। लहसुन की 2-3 कलियों को पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इन्हें चबाकर खा लें।

सारे नुस्खे एक साथ ना करें और परामर्श जरूर लें। अगर स्थिति कंट्रोल में नहीं आ रही तो तुरंत डाक्टरी चेकअप करवाएं। 

आप किस हैल्थ प्रॉब्ल्म के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।