मजदूर किस्म का मजबूर

एक मजदूर कड़ी धूप में चार्ट बेचता था। वैसे तो उसके पास नाना प्रकार के चार्ट थे, लेकिन जानवरों वाले चार्ट से उसे अधिक लगाव था। वह सपने में भी उसी चार्ट के जानवरों के बारे में सोचता रहता था। कुछ दिनों बाद उसकी बेचैनी बढ़ने लगी। उसकी बेचैनी को देखकर पढ़े-लिखे से दिखने वाले अनपढ़ लोगों ने उसे अस्पताल तो अनपढ़ से दिखने वाले पढ़े-लिखे लोगों ने उसे अंधविश्वास की दुकान पर जाने का सुझाव दिया। चूंकि अंधविश्वासों की दुकान अंधों के शहर में भी चश्मा बेचने में सिद्धहस्त होती हैं अतः मजदूर ऐसी किसी दुकान पर पहुँच गया। अपनी समस्या बताई। तब सामने वाले ने कहा -  

यदि तुमने सपने में रोते हुवे कुत्ते को देखा है तो इसका मतलब तुम्हारा चार्ट का धंधा चौपट होने वाला है। यदि केवल एक कुत्ते को देखा है तो इसका मतलब एक और चार्ट बेचने वाला तुम्हारा कंपटीटर बनने वाला है। तो क्या तुमने कुत्ता देखा है? नहीं। तब तो तुमने अवश्य बिल्ली देखी होगी। सपने में बिल्ली का दिखना मतलब नए चार्ट वाले से तुम्हारा जमकर झगड़ा होगा। तो क्या तुमने बिल्ली देखी है? नहीं। तब तो तुमने अवश्य शेऱ देखा होगा। शेर के देखने से तुम्हारे अनबिके सारे चार्ट महंगाई के जमाने में कौड़ियों के दाम बिकने वाले है। तुम आगे और चार्ट नहीं खरीद पाओगे। तो क्या तुमने शेर देखा है? नहीं। तब तो तुमने अवश्य बछड़ा देखा होगा। बछड़ा हमेशा अपनी गैया मैया के पीछे लगा रहता है। तुम्हारे किस्मत का बछड़ा भी बेरोजगारी की गैया के पीछे दौड़ लगाने वाला है। तो क्या तुमने बछड़ा देखा है? नहीं। तब तो तुमने ऊँट देखा होगा। अगर तुमने चलते हुए ऊंट को देखा है तो तुम्हारी तबीयत बिगड़ सकती है। बैठे हुए ऊँट का मतलब तुम्हारा भट्ठा बैठ जाने वाला है।

यह सब सुन परेशान होकर मजदूर ने कहा -  क्या अब मेरा कुछ नहीं हो सकता। मैं मजदूर हूँ। कुछ तो उपाय बताइए।

सामने वाले ने कहा – बेटा जिस तरह महंगाई बढ़ती जा रही है, उससे लोगों के खरीदने की क्षमता क्षीण होती जा रही है। जब खरीदना न होगा तब कंपनियों के होने का क्या मतलब? कंपनियाँ बंद मतलब रोजगार बंद। रोजगार बंद मतलब मजदूरी बंद। और जब मजदूरी बंद हो जाए तो मजदूर कहलाने वाला बंदा मजदूर नहीं मजबूर कहलाने लगता है। इसलिए सुनो मजदूर किस्म के मजबूर! जो भी पैसा कमाओ उससे जहर खरीदने की तैयारी शुरु कर दो। रसायन पदार्थों की कीमत आसमान छू रही हैं। इससे पहले कि जहर ज्यादा महंगा हो जाए तुम ....

समझ गया महाराज! मैं जल्दी से जहर खरीदकर अपनी देहलीला समाप्त करता हूँ।

सामने वाले ने कहा – अरे बेवकूफ! मैं तुम्हें मरने के लिए नहीं कह रहा। मैं तो कह रहा हूँ कि जहर के व्यापार का भविष्य उज्ज्वल है। क्यों न तुम जहर ही खरीद लो। फिर देखना मरने की होड़ में लगी दुनिया में तुम्हारा होना कितना सार्थक होगा।  

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’, मो. नं. 73 8657 8657