चांद में पति

 सारे बच्चे नानी के पास बैठे थे । बच्चे थोड़े सहमे हुये थे । गांव का वातावरण रात का सन्नाटा । शहर में तो सब अपने फ्लैटों में ए.सी में बन्द कमरों में सोते थे । सावित्री की तीनों बेटियाँ और एक बेटा सब शहर में रहते थे । बस सावित्री और उसके पति दीना नाथ  गांव के अपने इतने बड़े मकान को और खेती को छोड़ कर शहर जाना नहीं चाहते थे । गर्मियों की छुट्टियों में सब बच्चे गांव आ जाते  थे । 

दो साल से कोरोना ने सबको एक ही जगह बांध दिया था अबकी बार कुछ राहत मिली तो बच्चे नानी पास आगये पर अबकी बार बहुत कुछ बदल गया था गाँव में । जब रात को बच्चे नानी से कहते कि कहानी सुननी है नानी बस कहती आज नहीं कल क्योंकि रात होते ही एक आवाज आने लगती " तू चन्दा मै चांदनी तू तरुवर में छांव रे " बच्चे देखते एक महिला चन्द्रमा की ओर देख कर रात को रोती थी और गाना गाती थी ।

 इसको देख कर नानी बहुत उदास हो जाती । जब नानी से बहुत जिद की तब उन्होंने बताया ये कमली है वह गांव में सबकी चहेती सबका काम फुर्ती से निपटा देती । बस ऐसा कोरोना आया सब तहस नहस होगया । इसका पति और सास ससुर कोरोना आपदा में विदा होगये । यह आघात सहन नहीं कर पाई  सब गाँव वाले कहते जिसकी धरती पर भी जरुरत है शायद ऊपर भी उसकी जरुरत है। 

बस कमली ने सोच लिया ऊपर चांद रहता है और मेरे परिवार की उसको भी जरुरत थी तभी ऊपर बुला लिया । बस वह रात को आकर यही गाना गाती है और सोचती है कि मेरा पति इस चांद में है। बच्चे ये अनोखी कहानी सुन कर कमली के लिये सोचने लगे शायद उसको सही कर पाते ।

स्वरचित

डॉ.मधु आंधीवाल

अलीगढ़, madhuandhiwal53@ gmail.com