डूडा प्रकरण: जल शक्ति मंत्री का एफआइआर दर्ज करने का आदेश धरा रह गया, दोबारा पीड़ित पहुंचा मंत्री के दरबार में

- पीड़ित को किया आश्वस्त कहा जिलाधिकारी से होगा जवाब-तलब और दोषियों को मिलेगा दंड: रामकेश निषाद

बांदा। शहर के मोहल्ला हरदौली में स्थित कांशीराम कालोनी के ब्लाक 35, कमरा नंबर-552 के आवंटन में की गई गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी से लेकर महामहिम राज्यपाल तक पहुंची। जिस पर कई महीने गुजर जाने के बाद अभी तक कोई पुख्ता परिणाम नहीं आ सका। जरूर जांच के दौरान कई तरीके के करिश्मे आने से पीड़ित पक्ष इस कदर प्रभावित हो गया कि जब उसे प्रशासनिक स्तर पर परिणाम मिलने की आस टूट गई तो पीड़ित पक्ष ने न्याय की गुहार प्रदेश सरकार के राज्य जल शक्ति मंत्री रामकेश निषाद से लगाई, बीते 25 अप्रैल 2022 को प्रकरण की गंभीरता पर नजर डालते हुए मंत्री ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर प्रकरण में संलिप्त लोगों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराकर अवगत कराने के आदेश किए थे ।

लेकिन उसमें भी एक सप्ताह से उपर गुजर जाने के बाद जब कार्यवाही की कोई तस्वीर नहीं दिखी तो पीड़ित पक्ष ने मंत्री के दरबार में दोबारा पहुंचकर स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि आपके पत्र देने के बाद भी कार्यवाही होना तो दूर जिलाधिकारी कहते हैं कि मामला संज्ञान में नहीं है। जबकि आप द्वारा लिखा गया पत्र जिलाधिकारी को संबोधित था। मंत्री रामकेश निषाद ने प्रकरण की स्थिति और गंभीरता को भांपने के साथ कार्यवाही न  होने की जानकारी पर पीड़ित पक्ष को एक बार फिर आश्वस्त करने के साथ कहा कि अब पत्र लिखकर जिलाधिकारी से जवाब तलब किया जाएगा। 

मामला डूडा विभाग द्वारा हरदौली स्थित कांशीराम कालोनी में आवंटित कालोनी शकुंतला पत्नी प्रभुदयाल से संबंधित है। शकुंतला की मौत हो जाने के बाद उनके पुत्र राजकुमार वारिस के रूप में कालोनी लेने के लिए आवेदन किया। ब्लाक-35कमरा नंबर 552 आवंटित कालोनी में उनको आवंटन किया जाता कि उक्त कालोनी कक्ष में डूडा विभाग की शह पर किसी और को रख दिया गया। उधर वारिस राजकुमार ने जब कालोनी की मांग की तो डूडा ने पात्रता की जांच राजस्व प्रशासन से कराई। लेखपाल से लगाकर तहसीलदार तक ने अपनी भेजी रिपोर्ट में उक्त को पात्र बताया लेकिन पात्रता की रिपोर्ट डूडा पहुंचते-पहुंचते एक अक्षर न बढ़ जाने से अपात्र मानी गई।

 पात्रता के मामले की जांच डूडा ने राजस्व प्रशासन से दोबारा कराई। दोबारा भी वह पात्र निकला। लेकिन उसे माहों घुमाने के बाद कालोनी आवंटित नहीं की गई। पात्रता की रिपोर्ट में धरती फाड़कर या आसमान से टपके एक अक्षर न की जांच कराने की शिकायत रीना पत्नी राजकुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों से लगाकर राजभवन तक की। लेकिन न्याय की असली तस्वीर उसे सात माह से उपर गुजर जाने के बाद हासिल नहीं हुई। जरूर जांच कार्यवाही के चले दौर में एक समस्या और आड़े आ गई कि प्रकरण की जांच कराकर आख्या तैयार करने की जब बारी आयी तो जनवरी 2022 में तैयार आख्या में जांच में आरोपियों को दोषी ठहराया गया। 

पीड़ित पक्ष को एसडीएम सदर के स्टेनो अखिलेश ने जांच रिपोर्ट दिखाई संतुष्टता की बात पूछते हुए जांच आख्या की एक छायाप्रति भी उपलब्ध कराई जिसमें जांच अधिकारी सदर एसडीएम के हस्ताक्षर भी हैं। लेकिन समय ने चाल बदली बदलते-बदलते मार्च माह 2022 में एक नई जांच आख्या तैयार हो गई और इस जांच आख्या में पीड़ित की शिकायत ही निराधार हो गई। जनवरी 2022 व मार्च 2022 की जांच आख्या के आधार पर पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी, आयुक्त प्रमुख सचिव, महामहिम राज्यपाल व अन्य तक आपबीती कथा का इजहार कर दुखड़ा सुनाया और न्याय की फरियाद की लेकिन न्याय इतने गर्त में चला गया  िकवह मुकाम तक पहुंचने की अभी तक मन नहीं बना सका।

 बदली स्थिति और बदली जांच आख्याओं की रिपोर्ट को लेकर पीड़ित पक्ष ने 25 अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री रामकेश निषाद से मुलाकात की। दस्तावेज दिखाए। हालात देखकर उन्होंने 25 अप्रैल को जिलाधिकारी को संबोधित पत्र में संलिप्त लोगों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कर अवगत कराने के आदेश दिए। लेकिन कोई कार्यवाही जब पीड़ित को नजर नहीं आई तो उसने 3 मई मंगलवार के दिन मंत्री के दरबार में पहुंचकर एक बार फिर न्याय किए जाने की दरकार लगाने के साथ कहा कि आप के द्वारा लिखे गए पत्र में कार्यवाही होना तो दूर जिलाधिकारी ने यह कह दिया मामला संज्ञान में नहीं है। 

राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने यह जज्बात सुनकर अंदरखाने खफा होकर पीड़ित पक्ष को कार्यवाही होने के लिए आश्वस्त करते हुए कहा कि जाइये जिलाधिकारी से जवाब तलब किया जाएगा। पीड़ित पक्ष को एक बार फिर मंत्री ने आश्वस्त किया है कि न्याय होगा दोषियों को दंडित किया जाएगा। अब पीड़ित पक्ष मंत्री के आश्वासन पर उस वक्त के इंतजार में जब न्याय और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की तस्वीर उसके सामने आ सके।