नीली चिड़िया देगी सोने के अंडे! ?

ट्विटर के कमर्शियल/सरकारी यूजर्स पर थोड़ी सी फ़ीस की संभावना, जबकि कैजुअल यूजर्स के लिए फ्री!! 

ट्विटर प्लेटफार्म की कुछ सेवाओं को पेड सेवाएं करना, अपना प्रभुत्व बढ़ाना, अभिव्यक्ति की आजादी, एडिट बटन ऑप्शन जोड़ना इत्यादि रणनीतिक रोडमैप पर काम की संभावना - एड किशन भावनानी 

गोंदिया - वैश्विक स्तरपर एक मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी कंपनियों में से एक ट्विटर को दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी व्यक्ति द्वारा खरीदना और कमर्शियल/सरकारी यूजर्स पर थोड़ी सी फ़ीस की संभावना नए मालक द्वारा दिनांक 4 मई 2022 को अपने ट्विटर हैंडल से व्यक्त की है जबकि कैजुअल यूजर्स के लिए फ्री की बात टि्वट कर दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया है जिसके बारे में हर मीडिया प्लेटफॉर्म, टीवी चैनलों पर चर्चाएं चल रही है। 

हालांकि, ट्विटर में फीस आधारित सेवाएं कोई नया एलान नहीं है। वर्तमान में दी जा रही ट्विटर ब्लू सेवा भी फीस आधारित है। मामूली मासिक शुल्क के आधार पर यह ट्विटर के खास फीचर व ऐप की सुविधा इसकी सदस्यता लेने वालों को प्रदान की जाती है। हालांकि यह सुविधा अभी अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में ही उपलब्ध है। दुनियाभर में सरकारी व व्यावसायिक यूजर्स का भी बड़ा वर्ग है, जो ट्विटर का इस्तेमाल करता है। वह शुल्क लगाए जाने से प्रभावित होगा। 

ट्विटर के नए मालिक ने बीते दिनों 44 अरब डॉलर में इस सोशल साइट को खरीदा था। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नया मालिक अब ट्विटर में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से सबसे अहम बदलाव का संकेत मंगलवार को उन्होंने सरकारी व व्यावसायिक लोगों के लिए शुल्क की व्यवस्था लागू करने का इरादा प्रकट कर कर दे दिया।  ट्विटर को खरीदने के एलान के बाद नए मालिक ने कहा था कि मुक्त अभिव्यक्ति किसी भी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।  ट्विटर एक डिजिटल टाउन स्क्वायर है, यह मानवता के भविष्य पर चर्चा  का बड़ा मंच है। 

साथियों बात अगर हम टि्वटर के प्रभाव की करें तो, ट्विटर का प्रभाव उसके बिजनेस के साइज और यूजर्स की संख्या से काफी बड़ा है। क्योंकि ये प्लेटफॉर्म लोगों को एक ऐसा मंच देता है, जहा खबरें भी ब्रेक होती हैं और नरेटिव्स भी गढ़े जाते हैं और यही बात ट्विटर को एक शक्तिशाली टूल के रूप में स्थापित करती हैं। ट्विटर से किसी देश की सरकार के खिलाफ अभियान भी चलाए जाने की संभावना हो सकती है। नए मालिक ये भी जानते हैं कि वो ट्विटर की मदद से दुनिया के छोटे बड़े सभी देशों की सरकारों को प्रभावित करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल अपनी नीतियों और बिजनेस मॉडल को लागू करने के लिए कर सकते हैं। 

साथियों बात अगर हम ट्विटर के सेल डील की करें तो हफ्ते भर पहले ही,  माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के नए मालिक बन गए हैं। उन्होंने ट्विटर को खरीदने के लिए 44 बिलियन डॉलर, यानी करीब तीन लाख 36 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस डील के मुताबिक नए मालिक को ट्विटर के हर शेयर के लिए 54.20 डॉलर यानी करीब 4,150 रुपये चुकाए। हालांकि उनके पास पहले ही ट्विटर की 9.2 फ़ीसदी की हिस्सेदारी थी, लेकिन अब वो ट्विटर के अकेले मालिक बन चुके हैं। इस डील के बाद कंपनी में पूरी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी नए मालिक की हुई, याने हम कह सकते हैं कि उस नए मालिक की अन्य कंपनियों की तरह यह भी उसकी प्राइवेट कंपनी बन गई हैं।

साथियों लेकिन ऐसे में हम ये जरूर जानना चाहेंगे कि दुनिया के सबसे अमीर आदमी को ट्विटर जैसी कंपनी में ऐसा क्या दिखा कि वो इसे खरीदने के पीछे पड़ गए। क्यों कि ट्विटर की बैलेंसशीट बेहद खराब रही है और इस कंपनी ने ज्यादातर वक्त घाटा ही उठाया है, लेकिन इसके बावजूद नए मालिक ने टि्वटर के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च कर दी और अब वो इसके एकल स्वामी बन गए। 

साथिया बात अगर हम ट्विटर के पावर की करें तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति, भारतीय विपक्षी नेता सहित अनेक वैश्विक नामी-गिरामी लोगों के ट्विटर हैंडल बंद कर चुका है, जिससे हम ऐसा एक अंदाज लगा सकते हैं कि इसका महत्व भी अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था इसके अनेक पावर होते हैं जिसका इस्तेमाल करने से बड़े स्तरपर हलचल मच सकती है परंतु साक्षात प्रत्यक्ष रूप से उसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है। ट्विटर के नए स्वामित्व धारक का रुतबा वैश्विक स्तरपर बहुत सजगता और वजनदारी से बढ़ा है। हालांकि इसके स्वामित् धारक ने पूर्व में ही कहा था उसका उद्देश्य इससे लाभ कमाना नहीं बल्कि एक मजबूत अभिव्यक्ति की आजादी का प्लेटफार्म बनाना चाहता है।

नए मालक ने ट्विटर में एक और बड़े बदलाव के संकेत भी दिए थे। उन्होने ट्विटर पर ही एक पोल के जरिए लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वो ट्विटर में एडिट बटन का ऑप्शन देखना चाहते हैं। इस समय ट्विटर पर जो कुछ भी एक बार लिख कर पोस्ट कर दिया जाता है उसे ऑनलाइन एडिट करने की या उसमें बदलाव करने की कोई व्यवस्था नहीं है, हालांकि ट्वीट को डिलीट किया जा सकता है. फेसबुक समेत कई दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऑनलाइन कंटेंट को एडिट करने का ऑप्शन देते हैं और इसीलिए ट्विटर पर भी एडिट बटन की मांग बहुत पहले से की जा रही है। उम्मीद है अब नए मालक इसमें ये बड़ा बदलाव कर सकते।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नीली चिड़िया देगी सोने के अंडे!!? ट्विटर के कमर्शियल/सरकारी यूजर्स पर थोड़ी सी फ़ीस की संभावना!! जबकि कैजुअल यूजर्स के लिए फ्री!!ट्विटर प्लेटफार्म की कुछ सर्विसेस को पेड करना अपना प्रभाव जमाना, अभिव्यक्ति की आजादी, एडिट बटन ऑप्शन सहित रणनीतिक रोडमैप पर काम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 

-संकलनकर्ता लेखक - कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र