वो टूटता हुआ तारा..

देखो,,सुदूर आसमान में

चला आ रहा है अपनी ही गति में संलग्न..

अपने ही वैराग्य में मगन..

वो..टूटता हुआ तारा !!


न,,,न,,,ज़रा भी परेशान नहीं है

अपनी 'टूटन' से ,

जबकि जड़ें तो उसकी भी रही होगीं

आसमां के किसी कोने में !!


लगातार चलते रहना ही उसकी सुंदरता है

टूटन की परिभाषा से कहीं अधिक..

ठहराव की जिज्ञासाओं से कहीं अधिक..

बस, जिसका गिरना कोई नहीं चाहता !!


उसका टूटना

हर एक परिस्थिति में

विश्वास पर विश्वास रखना हुआ..

किसी की मन्नतों को सहेजे रखना हुआ..


यानि

टूटना हर बार 'कुछ टूटना' नहीं होता

किसी के लिए कुछ जोड़ना भी हुआ,,है न !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

मेरठ , उत्तर प्रदेश