मातृशक्ति एक ही

आँचल  शीतल छाँव,ममता का स्नेह - भाव,

स्नेह ज्ञान वरदान,  माता दिव्य शक्ति हैं ।


 जग दु:ख हरती माँ, देती सदा खुशियाँ माँ,

मन रखे सदभाव, प्रेम अभिव्यक्ति है।


जीवन की संपदा को, अविरल धार देती,

कर्म रुपी माँ का भाव,धर्म सत्य भक्ति है।


घर को मंदिर बना, सेवा भाव सिखलाती,

प्रथम वो पाठशाला , अज्ञानता मुक्ति है।


संकट जो आए द्वार, माँ संभालें पतवार ,

पढ़ा लिखा कर वहीं , हमें देती गति है।


समझाती वो जीवन, रहस्य के गुण धर्म,

सिंचित जो बिज धैर्य , सुफल संतृप्ति है।


भावभीने नैन होते, माता की मधुर यादें ,

नैनन में अश्रु आते , प्रीत माँ से अति है ।


आँचल में श्याम रंग, वस्त्र को जो धोती तब,

सुता को सदैव माँ से, मिले कर्म रीति है।


@ मीरा भारती,

 पटना,बिहार।