काव्य

समाज की कड़वी बुराइयों को मिटा सकें,

हर एक मानस में परम् प्रभाव जगा सकें,

अपना निपुण दक्ष मार्गदर्शक ऐसा चुनें

जो अपने कर्त्तव्यों को पूर्णत  से निभा सके !

जो आपके  मौलिक अधिकार को दिला सकें !


पीड़ितों के बहते आंसुओं को रोक सके,

अति संतप्त हृदयों में भी प्रमोद ला सके,

अपना निपुण दक्ष मार्गदर्शक ऐसा चुने

जो संकट में उम्मीद की किरण दिखा सके !

गरीबी के हरेक प्रपंचों को भगा सके!


हिंसा द्वेष की तेज अग्नि भी पनप न सकें,

मंगलमय विकास की गति सहज ही बढ़ सके,

अपना निपुण दक्ष मार्गदर्शक ऐसा चुनें

जो सेवा में प्रीति ,प्रसन्नता लूटा सकें!

दुर्बोध विषय को सुगमता से समझा सकें!


        ✍️ज्योति नव्या श्री

       रामगढ़ , झारखंड