भगवान के डाकिए

देखो कर रहा मानव,

शिकायत भगवान से।

तुम क्यों कष्ट देते प्रभु,

निर्मोही क्यों हो जाते हो।

बिन संदेश दिए ही,

अपने पास बुलाते हो।

सुनकर बातें ईश ये बोले,

चिठ्ठियांँ मैंने बहुत भेजी।

पढ़कर ना समझा अज्ञान,

बना रहा हरदम नादान।

पहला संदेश मैंने भेजा,

बालों में सफेदी आने लगी।

तूने काले कर लिए बाल,

जवानी छाने लगी।

दूजा संदेशा मैंने तुझको भेजा,

दिखे तुझे आंखो से कम,

चश्मा लगा कर बना भला।

तीजा संदेशा मैंने तुझको भेजा,

दांतों से खाना हुआ कम।

संदेशा तूने एक न माना,

ढूंढ लिए खाने के ढंग।

चौथा संदेशा भेजा मैने,

सुनना हुआ तुझको तो कम,

ऊंचा सूने कान मशीन  लगाए।

रास्ते सारे नए बनाए।

पांचवा संदेशा भेजा मैंने,

काया तेरी हुई जीर्ण क्षीर्ण।

लाठी लेकर  चलने लगा,

जरा ना हुआ तू तंग।

माया में उलझ कर भुला,

संदेशों को मेरे ना समझा।

कैसे भेजूं तुझे संदेशा,

कौन सा मार्ग में अपनाऊं।

हरि भजन मैं ध्यान लगा,

जीवन तेरा सफल बनाऊंँ।

       रचनाकार ✍️

       मधु अरोरा