अमिताभ ठाकुर ने चंदौली केस पर उठाए सवाल, कहा, मामले की जांच हो सीबीआई

लखनऊ। आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने चंदौली में दबिश के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में युवती की मौत मामले में सीबीआई जाँच की मांग की है। उन्होंने इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ तथा अन्य को भेजे प्रत्यावेदन में कहा कि इस मामले में 01 तथा 02 मई  2022 को एसपी चंदौली द्वारा ट्विटर पर दिए गए विडियो बयान से साफ है कि उन्होंने पहले घटना के घर के अन्दर होने तथा आत्महत्या होने आदि की संभावना व्यक्त की। बाद में भी बच्ची के पोस्ट मोर्टेम रिपोर्ट में दो चोटों के हलके चोट होने पर विशेष बल दिया। 

लगभग यही स्थिति एडीजी लॉ आर्डर के मीडिया बयान में भी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एसपी चंदौली व एडीजी लॉ आर्डर जैसे अफसरों के बयान पुलिस के बचाव में आते दिख रहे हैं। अतः न्यायहित तथा निष्पक्ष जांच हेतु उस केस को यूपी पुलिस से बाहर सीबीआई से करवाया जाना नितांत आवश्यक दिखता है, ताकि मामले में निष्पक्ष तथा पूर्वाग्रहहीन विवेचना हो सके तथा लोगों का उस विवेचना पर पूरा विश्वास बना रहे। बता दें कि बालू कारोबारी के घर यूपी पुलिस देने गई थी। मौके पर आरोपी घर पर नहीं मिला। 

पीड़ित परिजनों का आरोप है कि दबिश देने आई पुलिस ने घर में युवती के के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। जब युवती ने इसका विरोध किया तो उसे पीटा गया जिसे उसकी मौत हो गई। मौत के ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई के आदेश दिए। आनन-फानन में  सोमवार को निलंबित थानाध्यक्ष समेत 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पुलिस अधीक्षक ने बताया युवती की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर्फ गले पर खरोंच और जबड़े पर बायीं तरफ मामूली चोट के अलावा पूरे शरीर पर और कोई भी बाहरी या अंदरूनी चोट नहीं पाई गई। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद बलात्कार के आरोप को जांच के दायरे में रखा है।’’ उन्होंने बताया कि मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक-सदर को सौंपी गई है। हालात के मद्देनजर गांव में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दिया गया है।