मैं हूं ना

अपना अंहकार छोड़ कर तो देख मैं हूं ना

मुझे अपना बना कर तो देख मैं हूं ना।

विश्वास थोड़ा करके तो देख मैं हूं ना,

गमो में याद करता है मुझे मैं हूं ना।

सुख मैं भी याद कर के देख मैं हूं ना

रास्ता दिखाता हूं तुझे मैं हूं ना।

हर एक की सांस में बसा मैं हूं ना

भाव अपने अर्पित करके देख मैं हूं ना

आगे बढ़कर हाथ थाम ता तेरा मैं हूं ना

तेरे हर दुख का सहारा बना मैं हूं ना

तुझ में ही तो मैं रहता हूं दिन रात

संग तेरे चलता हूं मैं हूं ना।

किसी ना किसी रूप में तुझे बचाने आता

हर परेशानी से उबारता मैं हूं ना।

              रचनाकार ✍️

              मधु अरोरा