डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए जामुन की गुठली है फायदेमंद, अपनाएं ये आयुवेर्दिक तरीका

आपने बचपन में एक कहावत तो जरूर सुनी होगी कि आम के आम, गुठलियों के दाम, यही कहावत जामुन के बारे में भी बिल्कुल ठीक बैठती है। अगर आप भी अब तक जामुन खाने के बाद उसकी गुठलियां बाहर फेंकते रहे हैं तो अब ऐसा न करें। जी हां, अगर आपके घर में कोई डायबीटीज रोगी है तो यह गुठलियां उसके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आइए जानते हैं क्या कहता है आयुर्वेद।  

आयुर्वेद के अनुसार जामुन की गुठली डायबीटीज के मरीजों के लिए बेहतरीन औषधि है। जामुन में मौजूद एंटी डायबिटीक, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेंट्री गुण व्यक्ति को कई गंभीर रोगों से दूर रखने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो जामुन का सेवन डायबिटीज और एनीमिया से ग्रस्त मरीजों के लिए रामबांण इलाज है, यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से कम करके  नियंत्रित करने में मदद करता है।

मधुमेह कंट्रोल करने के लिए सबसे पहले जामुन खाने के बाद इसकी गुठलियों को फेंकने की जगह एक साफ बर्तन में जमा करते रहें।इसके बाद इन गुठलियों को अच्छी तरह धोने के बाद एक साफ कपड़े पर रखकर 3-4 दिन के लिए सूरज की रोशनी में सूखने के लिए छोड़ दें। एक बार जब सभी गुठलियां सूख जाएं तो उनकी ऊपरी परत यानी छिलका उतारकर अंदर वाले हरे भाग को दो हिस्सों में तोड़ लें। इसके बाद इसे भी कुछ दिन और सूखने के लिए छोड़ दें। जब बीज अच्छी तरह से सूख जाएं तो इन सूखे हुए बीजों को मिक्सी में पीसकर उसका पाउडर बना लें। अब ये पाउडर एक डिब्बे में रख लें। 

कैसे करें जामुन की गुठली से बने पाउडर का सेवन?

रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में जामुन की गुठली से बने पाउडर का एक चम्मच मिलाकर पिएं।

जामुन खाने के फायदे-

- जामुन का रोजाना सेवन करने से पेट संबंधित समस्याएं दूर होती हैं। 

- इसकी छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पेट दर्द और अपच जैसी समस्याएं दूर होती हैं। 

- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी जामुन मददगार है।

-जामुन का सेवन करने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है। 

-पथरी की समस्या होने पर जामुन की गुठली का पाउडर बनाकर दही में मिलाकर खाने से राहत मिलती है। 

ध्यान रखें ये बात-

हालांकि आयुर्वेदिक औषधियां सेहत पर किसी तरह का साइडइफेक्ट नहीं करती हैं, लेकिन फिर भी इस नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार आप अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।