बाल विवाह

बचपन अभी तो था मेरा,

क्यों तूने ब्याह रचाया मांँ।

बाली सी उम्र में तूने,

मुझको दूर भगाया मांँ।


कलियों सा था बचपन मेरा

यूं ही उसको मुरझाया।

पढ़ना चाहती थी मैं तो,

तूने  मेरा क्यो ब्याह रचाया।


पढ़ लिखकर कुछ बन जाती,

नाम तेरा रोशन कर जाती।

उड़ने  के थे सपने  मेरे,

काश मैं भी उड़ पाती।


मासूम सी तो गुड़िया तेरी,

दुनियादारी नहीं समझती।

इतनी कम उम्र में मेरा,

मां तूने क्यों ब्याह रचाया।


सपने सारे दफन किए,

उम्मीदों के अपने तो।

उड़ने से पहले सबने,

पर मेरे क्यों काट दिए।


उलझ कर रह जाऊंगी जीवन में,

समझ कुछ भी ना पाऊंँगी।

गलती होगी हर बार मुझसे,

याद में तेरी आंसू बाहूँगी।।


             रचनाकार ✍️

             मधु अरोरा

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