बेसुध जी की कहानी "अपना सिंदूर लेलो" का हुआ लोकार्पण

जखनियां/गाजीपुर। विरनो थाना क्षेत्र के रामपुर फत्तेपुर कहोतरी आजाद इण्टर कालेज के सभाकक्ष में पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कालेज के सभागार में खचाखच भरे साहित्य प्रेमियों के मध्य क्षेत्र के‌ वरिष्ठ साहित्यकार हरिनारायण यादव"बेसुध"द्वारा लिखित कहानी संग्रह 'अपना सिंदूर लेलो, तथा अबतक की कविताएं का सफल लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार रामअवतार जी के कर कमलों द्वारा किया गया। जहां 128 पृष्ठ पर अंकित 18 कहानियो का सामयिक अनछुए पहलुओं पर आधारित संकलन मानवीय अंतर्मन की संवेदनात्मक प्रस्तुति का अकाट्य उदाहरण लगा। 

वहीं विभिन्न विषय वस्तुओं पर केंद्रित कविता की कामिनी अपनें आपमें अद्भुत और काफी प्रभावशाली लगी। उपस्थित विद्वान साहित्य कारों ने बेसुध जी की रचित और लिखित पुस्तक की साहित्यिक दृष्टि से समीक्षा करते हुए व्यापक प्रकाश डालते हुए कहा कि  पेशे से शिक्षक रहे हरिनारायण यादव बेसुध जी ने अपनी कविताओं और कहानियों के जरिए समाज को नसीहत देने भरपूर प्रयास किया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण स्वागत से हुआ। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें  जनपद के जानेमाने सशक्त काव्य हस्ताक्षरों ने भाग लिया। जिसमें कामेश्वर द्विवेदी, विजय कुमार मधुरेश,सूरज पाण्डेय , हरिनारायण यादव बेसुध, गौरीशंकर पाण्डेय सरस, सुदर्शन कुशवाहा चिराग,विमल जी, गंगेश जी ने अपनी  रचना विधाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। वरिष्ठ कवि मधुरेश ने भ्रष्टाचार में संलिप्त समाज पर करारा व्यंग"कैसे काम होगा दफ्तरों में जब दलालों ने अफसरों से दोस्ती कर ली"मुक्तक सुनाकर सच्चाई बयां कर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

 गौरीशंकर पाण्डेय सरस ने समाज में बेटियों के साथ हो रहे अभद्रतापूर्ण व्यवहार पर केंद्रित गीत "अब तो कहने लगी बेटियां" जुल्मों सितम ढा रहा है जमाना" सुना कर बेटियों के दर्दको रेखंकित किया। अन्य कवियों ने भी अपने रचना के माध्यम से सच्चाई परोसा। इस मौके पर प्रधानाचार्य रामबदन यादव,पारस नाथ यादव जिला पंचायत सदस्य, जनार्दन जी पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष, श्रीनिवास जी, सुरेश कुमार राय जी, तथा गाजीपुर समाचार के संपादक संजय कुमार जी सुजित जी आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सूरज पाण्डेय और संचालन गंगेश जी ने किया। अंत में कवि और नाटककार विमल कुमार जी ने अपनी खोज कृति रानी पुर के लोग प्रकाशित पुस्तक उपस्थित सादर सप्रेम भेंट किया।